आजादी के आंदोलन में कूदी थीं मनकुआं की वीरांगनाएं
नींदडू़। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित असंख्य महिलाओं ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भाग लिया। कुर्बानी देने वाली ऐसी आदर्श वीरांगनाओं में मनकुआं की तीन महिलाएं अपने पुत्रों के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहीं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, चरख संघ के प्रबंधक जसवंत सिंह के आग्रह पर 13 अक्तूबर 1929 को विजयदशमी के दिन करीब पूर्वाह्न 11 बजे रेलगाड़ी द्वारा मुरादाबाद से धामपुर पहुंचे। उनके साथ मीराबेन, पुरुषोत्तम दास टंडन, आर्य जेबी कृपलानी और निजी सचिव प्यारेलाल आदि कई लोग थे। गांधी जी ने केएम इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित किया। इसमें 20 हजार लोग इकट्ठा हुए थे। इनमें पांच हजार महिलाएं थीं। मनकुआं से डॉ. लाखन सिंह अपनी माता हरदेई, किशोर मनोहर सिंह अपनी माता फूलवती देवी एवं प्रवीण सिंह अपनी माता युद्धिया देवी के साथ गांधी जी के विचार सुनने के लिए नौ किलोमीटर का पैदल सफर करते हुए धामपुर पहुंचे थे। कई अन्य व्यक्ति भी सभा में पहुंचे। गांधी जी के विचारों से प्रभावित सैकड़ों लोगों ने देश की आजादी की लड़ाई में शामिल होने का प्रण लिया।
आजादी के मतवाले ग्रामीण अंग्रेजों की प्रताड़ना से बचने और आंदोलनकारी गतिविधियों में शामिल रहने के लिए अपने घरों से दूर जंगल में छिपे रहते थे। महिलाएं न केवल उनके भोजन की व्यवस्था करतीं, अपितु दिन भर होने वाली गतिविधियों से भी अवगत कराती थीं। इन पर अंग्रेजी शासन का विरोध करने और विदेशी कपड़ों की होली जलाने के आरोप में आर्थिक दंड लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने के कारण कुर्की की गई। पुलिस घर का समस्त सामान, किवाड़, चौखटें और छत की लकड़ियां तक अपने साथ थाने ले गई। 1933 में हरदेई, फूलवती देवी और युद्धिया देवी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इनसे जेल में आटा पीसने और खाना बनाने का कार्य कराया गया।