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तालाबों में फिर खिलेंगे कमल, साल भर रहेगा जल

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बिजनौर में तालाब की खोदाई करते मजदूर। - फोटो : BIJNOR
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तालाबों में खिलेंगे कमल, साल भर रहेगा जल
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बिजनौर। तालाब पृथ्वी के प्रकृति प्रदत्त आभूषण है। ग्लोबल वार्मिंग से तालाब सूखते जा रहे हैं। परंतु अब जल्द ही पंचायतों में बने तालाब पूरे साल पानी से लबालब भरे दिखाई देंगे। पशु पक्षियों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिलेगा। साथ ही इन तालाबों में कमल सहित विशेष प्रजाति की घास भी लगवाई जाएगी। भूमिगत जल स्तर स्थिर होगा। सीडीओ ने बताया कि विभिन्न विभागों के सहयोग से योजना का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा। सोलर पंप या रजबहों के माध्यम से इन तालाबों में पानी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
जिले में वित्तीय वर्ष 2021-22 में जल संचयन पर खूब काम हुआ। पंचायतों में 334 तालाबों का जीर्णोद्धार हुआ। एक दर्जन से अधिक आदर्श तालाब बने। प्रशासन को भीषण गर्मी में तालाबों के सूखने की शिकायत मिली। अब तालाबों में एकत्रित बरसाती व घरेलू पानी को रोकने की योजना है। सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि तालाबों में विशेष प्रकार की घास लगवाई जाएगी। विशेष घास से घरेलू गंदा पानी प्राकृतिक तरीके से स्वच्छ होगा। पानी का क्षरण रुकेगा। तालाबों के दो दो हिस्से कराए जाएंगे। एक हिस्से में गंदा पानी रहेगा। दूसरे हिस्से में स्वच्छ पानी होगा। जो पशुओं, जंगली जानवरों की प्यास बुझाने के काम आएगा। गुलदार आदि जंगली जानवर आबादी में नहीं आएंगे।
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कई विभागों से लेंगे सहयोग : सीडीओ
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि अधिक गहराई वाले प्राचीन तालाबों में पानी के नेचुरल श्रोत हैं। उन तालाबों में वर्ष भर पानी रहता है। नए तालाब दो से तीन फुट गहरे हैं। इन तालाबों का पानी गर्मी में सूखने या कम होने की शिकायत आती है। शासन का प्रयास है कि तालाबों में 12 महीने पानी रहे। इसके लिए पंचायतों में सोलर पंप लगाने, नहरों व रजबहे, सरकारी ट्यूबवेल से जल आपूर्ति की व्यवस्था कराने की योजना पर विचार चल रहा है। योजना में सोलर, नहर, नलकूप आदि विभागों का सहयोग होगा। जानकारी के अनुसार गंगा किनारे की पंचायत में 25-30 फुट गहराई पर, पठारी क्षेत्र जहां जमीन सख्त है 50-60 फुट गहराई पर तथा पहाड़ी क्षेत्र में 150 फुट गहराई पर पानी है। योजना पानी की गहराई को ध्यान में रखकर बनेगी।
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