आज विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष : डिजिटल दौर में पुस्तकों से दोस्ती कर रहे युवा
बिजनौर। डिजिटल के दौर में युवा पुस्तकों से दोस्ती कर रहे हैं। जिले के दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एवं सांस्कृतिक केंद्र में युवा अपना किताबों से खूब ज्ञानवर्धन कर रहे हैं। डिजिटल के साथ-साथ अब युवा पुस्तकों से भी तैयारी कर रहे हैं। इन युवाओं की माने तो किताबों से पढ़ा ज्यादा समय तक याद रह जाता है, इसलिए किताबों से लगाव बढ़ता जा रहा है। विद्यार्थियों के हाथों में फोन से ज्यादा किताबें दिखाई दे रही है।
शहर में शक्ति चौक के आसपास तीन पुस्तकालय हैं। इन पुस्तकालयों में विद्यार्थी अपने भविष्य को संवारने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। पढ़ने के लिए पुस्तकालय से अच्छी जगह कहीं हो ही नहीं सकती है। इसका जीता-जागता सबूत जिले के पुस्तकालय हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं भारी संख्या में लाइब्रेरी पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एवं सांस्कृतिक केंद्र में छात्र-छात्राओं के पढ़ने के लिए करीब ढाई हजार पुस्तकें हैं। डिजिटल के दौर में भी युवा किताबों से तैयारी कर रहे हैं। गिने-चुने विषयों की ही ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं। विद्यार्थियों की किताबों से लगन साफ दर्शाती है कि किताबी ज्ञान कभी कम नहीं होता है। इन पुस्तकालयों में जाने वाले युवाओं को संख्या 100 से ऊपर पहुंच चुकी है।
किताबों से होती है अच्छी पढ़ाई : फैसल
फैसल वसीम ने बताया कि वह यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। तैयारी के लिए सबसे अच्छा माध्यम किताबें ही है। मोबाइल से तो कुछ ही विषयों की क्लास ली जाती है। आगे बढ़ने के लिए किताबों को पढ़ना बहुत जरूरी है।
किताबों से बेहतर होती है तैयारी : शुभम
शुभम कुमार ने कहा कि यूपी पुलिस की तैयारी कर रहा है। जिसके चलते वह दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एवं सांस्कृतिक केंद्र में आकर पढ़ता है। यहां पढ़ाई का अच्छा माहौल है। साथ ही मोबाइल से ज्यादा किताबों से सीखने को मिलता है।
परीक्षा के लिए किताबें अच्छी साथी : अनमोल
अनमोल भारद्वाज ने बताया कि वह भी पुस्तकालय में तैयारी करने आती है। किताबों से अच्छा साथी कोई नहीं हो सकता है। आज भी डिजिटल के दौर में किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। डिजिटल पर हर चीज को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है।
पुस्तकालय में न पढ़ने वाले न जगह
राजकीय जिला पुस्तकालय के भवन में करीब 20 हजार पुस्तकें हैं। लेकिन इन्हें न तो कोई पढ़ने वाला है और न ही पढ़ने के लिए जगह है। इस पुस्तकालय में ज्यादातर पुस्तकें इतिहास और साहित्य की अलग-अलग मतों के लेखकों की हैं। पढ़ने वाले न होने से पुस्तकें आलमारी में सजी रखी हैं। इन किताबों को पढ़ने वालों का बहुत दिनों से इंतजार है। राजकीय जिला पुस्तकालय के इंचार्ज नरेश कुमार ने बताया कि इस पुस्तकालय की स्थापना करीब 1960 के आसपास हुई थी। पुस्तकालय में पुस्तकें बहुत हैं, लेकिन पढ़ने वालों की कमी है।