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विकास की दौड़ में पिछड़ा जिले का सबसे बड़ा गांव

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विकास की दौड़ में पिछड़ा जिले का सबसे बड़ा गांव
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नींदडू़। नींदडू़ जनपद के सबसे बड़े गांवों में से एक है। इसकी कुल आबादी 22 हजार से अधिक है। पूर्व प्रधानों की ओर से अनमाने ढंग से किए गए प्रयासों के चलते बड़ी आबादी के गांव में कई समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि नगर पंचायत बने बगैर ऐतिहासिक गांव नींदडू़ का सर्वांगीण विकास होना संभव नहीं है। धामपुर-नूरपुर राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर बसे जिस गांव को नींदड़ू नाम से जाना जाता है, वहां पंद्रहवीं शताब्दी में राजा नवल सिंह चौहान का शासन था। तब नवल सिंह द्वारा बसाए गए नींदडू़ का नाम नवलगढ़ था, जो बाद में निंदड़गढ़ हुआ और अब नींदडू़ कहलाता है।
मुगल सम्राट बाबर के सिपहसालार फतेहउल्लाह खां की तुर्क फौज ने राजा नवल सिंह को परास्त व उनकी हत्या कर नींदडू़ को मुगल साम्राज्य में शामिल कर लिया था। नींदडू़ में पांच गांवों पर आधारित तीन ग्राम पंचायतें हैं। नींदडू़ खास ग्राम पंचायत में नींदडू़ खास व चक नींदडू़, बाजीदपुर-बीरू में बाजीदपुर व महाबतपुर बीरू और मोहम्मद अलीपुर भिक्कन में एक गांव हैं। सबसे बड़ी समस्या सड़क व नालियों के रखरखाव और साफ-सफाई की है। नींदडू़ खास में चार, बाजीदपुर-बीरू व मोहम्मद अलीपुर भिक्कन में दो-दो सफाई कर्मचारी, रिक्शा ठेलियां और एक ट्रैक्टर ट्राली होने के बावजूद जगह जगह कूड़े की ढेरियां और नालियों में कीचड़ भरा रहता है।
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हालांकि, तीनों पंचायतों में रास्ते व गलियां आरसीसी की हैं। सड़कों पर झाड़ू नहीं लगने एवं नालियों की नियमित व तलीझाड़ सफाई नहीं होने से गंदगी का साम्राज्य व संक्रामक रोग फैलने की आशंका रहती है। दूसरी समस्या रोशनी की है। बिजली के खंभों पर प्रकाश हेतु जो लाइटें लगाई गईं, उनमें अधिकांश कुछ दिनों बाद ही खराब हो गईं। शुद्ध पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप व कई जगह प्याऊ लगे हैं, लेकिन बिजली का बिल जमा नहीं होने के कारण कनेक्शन कटने से जलापूर्ति ठप है। पंचायतें खुले में शौच से मुक्त हैं, किंतु किसी पंचायत में सामुदायिक शौचालय नहीं है।
शिक्षा का स्तर निम्न है। इंटरमीडिएट और डिग्री कॉलेज की क्षमता वाले गांव में चार प्राथमिक, दो उच्च प्राथमिक और एक माध्यमिक विद्यालय है। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए धामपुर या कॉलेज वाले गांवों में जाना पड़ता है। राजकीय यूनानी अस्पताल के अलावा कई निजी चिकित्सक हैं, किंतु इस बड़े गांव में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। भारतीय स्टेट बैंक व प्रथमा ग्रामीण बैंक के अतिरिक्त दो मुस्लिम फंड हैं। पंजाब बैंक की शाखा का अभाव है। बुधवार व रविवार को साप्ताहिक बाजार लगते हैं। स्थानाभाव के कारण दुकानदार सड़क के किनारे फड़ लगाते हैं, जिससे राहगीरों को परेशानी होती है।
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2007 में भी हुआ था नगर पंचायत बनाने का प्रयास
जिलापंचायत के पूर्व सदस्य मुजीबुल जफर, पूर्व प्रधान गुलजार अहमद, सुशिक्षित किसान अतहर निशात, साधन सहकारी समिति के पूर्व सभापति नजाकत हुसैन, समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष जावेद अख्तर और युवा चिकित्सक डा. उस्मान जकी का कहना है कि 2007 में तीनों ग्राम पंचायतों को मिलाकर नगर पंचायत बनाने का प्रयास किया गया था। तत्कालीन राज्यमंत्री मूलचंद चौहान और विधायक अशोक राणा ने अपने अपने स्तर से संस्तुति की थी, किंतु ऑन रिकार्ड आबादी पूरी नहीं होने से नगर पंचायत का सपना पूरा नहीं हो सका। आशा है कि 2021 में मानक पूरा होने के साथ नींदडू़ के नगर पंचायत बनने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
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