लैब से जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा
बिजनौर। कोरोना महामारी की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग आरटीपीसीआर से जांच का दायरा बढ़ाएगा। शासन से मिले निर्देश के बाद विभाग ने यह फैसला लिया है। फिलहाल रेपिड एंटीजन किट से प्रतिदिन करीब एक हजार और आरटीपीसीआर से लगभग 750 जांचें हो रहीं हैं। लेकिन एंटीजन वायरस को पकड़ने में अब कारगार साबित नहीं हो रहा है। चिकित्सकों के अनुसार आरटीपीसीआर की जांच 99 प्रतिशत सही मानी जा रही है। ऐसे में अब 75 प्रतिशत जांच आरटीपीसीआर से होंगे।
कोरोना के शुरुआती दिनों में केवल रिजर्व ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमेराज चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) यानी प्रयोगशाला को भेजे जाने वाले सैंपल से ही जांच हो रही थी। वर्तमान में आरटीपीसीआर की जांच में दो से तीन दिन लगते हैं, जबकि एंटीजन किट से दस से 15 मिनट में ही परिणाम आ जाता है। करीब पांच महीने से जिले में जांच की दर बढ़ाने के दबाव के चलते एंटीजन किट से ज्यादा जांच होने लगीं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे एंटीजन किट वायरस को पकड़ने में कमजोर साबित होने लगा। अब रेपिड एंटीजन किट के वायरस पकड़ने की क्षमता बेहद कमजोर हो गई है।
कोरोना के नोडल अधिकारी डा. देंवेंद्र कुमार के अनुसार कोरोना की जांच अब रेपिड एंटीजन किट की अपेक्षा आरटीपीसीआर से अधिक होगी। इसकी शुरुआत जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर होगी। हर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिदिन 50 से अधिक सैंपल लेकर आरटीपीसीआर जांच के लिए नोएडा की प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि आरटीपीसीआर से जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार के बीच कोरोना की जांच की जाएगी।