-जिले की ग्रामीण पृष्ठभूमि निकले हैं विश्व स्तर के वैज्ञानिक
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बिजनौर। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विद्यालयों में स्थित खगोल विज्ञान प्रयोगशालाओं में बच्चों को विज्ञान के शोधों की जानकारी दी गई। देश, प्रदेश व जिले के वैज्ञानिकों की उपलब्धि बताई गई। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों ने बच्चों को वैज्ञानिक तथ्यों को प्रयोगशालाओं में प्रयोगों के द्वारा प्रदर्शित किया।
सीडीओ पूर्ण बोरा के प्रयासों से जिले के प्राथमिक विद्यालयों में खगोलीय प्रयोगशाला खुलीं। दिल्ली व हैदराबाद से आए वैज्ञानिकों ने प्रयोगशालाओं में खगोलशास्त्र की उपलब्धियों को चित्रों द्वारा दर्शाया है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर खगोलीय प्रयोगशाला में विज्ञान की उपलब्धि को बताया गया।
सीडीओ पूर्ण बोरा के अनुसार अफजलगढ़ ब्लाॅक के भवानीपुर, धामपुर ब्लाॅक के अल्लैहपुर, जलीलपुर ब्लाॅक के बासा तथा किरतपुर ब्लाॅक के भनैड़ा पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों की खगोलीय प्रयोगशालाओं में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के कार्यक्रम हुए।
सौर मंडल की जानकारी दी
बच्चों को सौर मंडल की अद्भुत कलाओं के बारे में बताया। चांद, तारे, सूर्य आदि ग्रहों का प्रदर्शन वैज्ञानिक तथ्यों के साथ किया। रसायन विज्ञान के दैनिक जीवन से जुड़े तथ्यों का प्रयोग करके दिखाया गया। बच्चों ने शिक्षकों से सवाल करके खगोल विज्ञान से जुड़ी अपनी जिज्ञासा शांत की। देश व प्रदेश समेत जिले के वैज्ञानिक की शोध क्षेत्र की उपलब्धि को बताया।
ये वैज्ञानिक तथ्य बताए गए
जलीलपुर ब्लाॅक के प्राथमिक विद्यालय बास्टा की इंचार्ज प्रधानाचार्या पूजा रानी ने बताया कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विज्ञान के सामान्य उपकरणों का प्रदर्शन हुआ। बच्चों को उपकरण की जानकारी दी। साथ ही मानव संरचना, टेलिस्कोप का प्रदर्शन किया। मानव के अंगों व उनके कार्य के बारे में बताया गया। भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान व जीव विज्ञान के चार्ट का प्रदर्शन किया। बच्चों ने विज्ञान से जुड़े चित्र बनाए। कक्षा चार व पांच के बच्चों अरशद, जारा, अल्फेज, अक्षय, प्रियांश ,रोहन आदि ने विज्ञान के साधारण सवाल पूछे।
जिले से निकले विश्व स्तरीय वैज्ञानिक
जिले में अनेक वैज्ञानिक ऐसे हुए हैं, जिनकी उपलब्धियां विश्व स्तर की रही हैं। ये वैज्ञानिक ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकले हैं। इनमें प्रमुख हैं हल्दौर ब्लॉक के गांव पिलाना के डाॅ. आत्माराम, जिन्होंने राष्ट्रीय भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला दिल्ली में शोध किया। मोहनपुर चांदा नंगली के डॉ. यशपाल सत्य, जिन्होंने आईआईटी दिल्ली में शोध किया। डॉ. यशपाल ने जिले में जैविक खेती का जनक कहा जाता है।