- फिर चलने लगे फव्वारे, जल्द माइनर में चलेगी पैंडल नाव
- गौरेया और पक्षियों के संरक्षण के लिए लगाए जा रहे घौंसले
- 35 लाख रुपये का बजट वन विभाग को मिला
- 25 साल बाद इंदिरा पार्क की लौटी रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। इंदिरा पार्क एक समय शहर की सबसे बड़ी समस्या रही है। करीब दस साल इंदिरा पार्क का एक बड़ा हिस्सा गंदे तालाब में तब्दील रहा। एकलौता पार्क होने के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब 25 साल बाद इसकी रौनक फिर से लौटने लगी है। अब फिर से पार्क के माइनर में जहां पैडल नाव चलती दिखेगी, वहीं फव्वारों में फिर से पानी आने लगा है। इसके साथ ही पैदल घूमने वाले वहां लगाए जा रहे घौंसलों में चिड़यों को निहार सकेंगे।
इंदिरा पार्क शहर की बड़ी पहचान भी है। 25 साल पहले की बात करें तो यहां पर बने माइनर में घड़ियाल, कछुए, पार्क के एक हिस्से में हिरण देखे जाते थे। नीचे की ओर माइनर में पैंडल नाव चलती थी। इसके बाद आवास विकास कॉलोनी का पानी की निकासी के लिए बने नाले की दीवार तेज वर्षा के कारण टूटी और गंदे पानी ने पार्क को तबाह कर दिया। बड़ा हिस्सा गंदे तालाब में बदल गया। 15 साल से भी ज्यादा समय तक यहां पर यह पानी भरा रहा। पार्क में गंदगी के ढेर लग गए। लोगों का इंदिरा पार्क में आना बंद हो गया और पार्क में वीरानगी छा गई। कई बार पार्क के लिए आंदोलन हुए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पिछले कुछ साल में धीरे-धीरे सुधार तो हुआ, लेकिन वह काफी नहीं था। अब वन विभाग ने शासन से पार्क को सुधारे के लिए बजट मांगा तो शासन ने 35 लाख का बजट आवंटित कर दिया। इस समय पार्क फिर से अपने दो दशक पहले की पहचान में लौटने लगा है।
फव्वारे चले, गौरेया के घौंसले लगाए
पार्क के ऊपर के हिस्से में जहां ओपर जिम पहले ही लग चुका था, वहीं अब इसके पास के फव्वारों का सुंदरीकरण कराकर शुरू करा दिया गया है। बीच में बने पुस्तकालय और कैंटीन को भी ठीक कराया जा रहा है। इसके अलावा गेट पर एक पूछताछ केंद्र भी बनाया जा रहा है। जहां से पार्क में एंट्री मिलेगी। इसके अलावा यहां की कैंटीन भी सुधारी जा रही है।
बिजनौर ही पहचान बनेगा इंदिरा पार्क
एसडीओ वन विभाग ज्ञान सिंह ने बताया कि इंदिरा पार्क में पक्षियों के संरक्षण भी किया जा रहा है। पंचवटी के आसपास लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। साथ ही बच्चों के खेलने के लिए झूले, ओपन जिम भी है। 70 लाख का बजट शासन से मांगा गया था। 35 लाख मिल चुके हैं। जल्द ही यहां पर पैंडल नाव भी चलेगी।