बाल साहित्य सहित कई विधाओं में हिंदी का बढ़ा रहे गौरव
बिजनौर। जनपद के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय चौधरी हिंदी की कई विद्याओं में लिखने वाले लेखक हैं। वह बाल साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं। वह अजय जनमेजय के नाम से अपनी रचनाएं लिखते हैं। 28 नवंबर 1955 को हस्तिनापुर में जन्मे डॉ. अजय चौधरी का कार्य क्षेत्र बिजनौर रहा।
एमबीबीएस, डीसीएच की डिग्री प्राप्त डॉ. अजय चौधरी बिजनौर में अपना हॉस्पिटल चलाते हैं और साथ ही कविताएं भी लिखते हैं। उनकी अब तक हिंदी की विभिन्न विधाओं में 20 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि उन्होंने 8 पुस्तकों का संपादन किया है और सात देशों की साहित्यिक यात्रा कर चुके हैं। डॉ. अजय चौधरी की प्रमुख पुस्तकों में सब सूली पर टंगने हैं, तुम्हारे बाद, मेरी 111 गजलें हैं। उन्होंने बाल साहित्य भी खूब लिखा है। उनकी बाल साहित्य की प्रमुख पुस्तकें पूरा हिंदुस्तान तिरंगा, हरा समंदर गोपी चंदर, निंदिया सबसे प्यारी तू, तिरंगा प्यारा, नन्हें पंख ऊंची उड़ान, कमरे में रेल है। उनके द्वारा संपादित पुस्तकों में ईचक दाना बिचक दाना, बाल सुमन के नाम, हिंदी की चर्चित गजलें, समय की शिला पर आदि है। उनकी बेटियों पर 222 मुक्तक पुस्तक को बेहद सराहा गया। उन्होंने लोरियों पर भी पुस्तक लिखीं, जिसमें 67 लोरियां हैं। डॉ अजय जनमेजय सात देशों की साहित्यिक यात्रा कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। बच्चा आसानी से सीख जाता है लेकिन उसे पढ़ाई के लिए दूसरी भाषाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने की आवश्यकता है।
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राष्ट्रपति भी कर चुके हैं सम्मानित
निश्तर खानकाही के शिष्य रहे डॉ. अजय जनमेजय को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय करीब ढाई दर्जन से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सम्मानित किया। इसके अलावा तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार, अलकनंदा गायकवाड बाल साहित्य पुरस्कार, दुष्यंत अवार्ड, पंडित सोहनलाल द्विवेदी साहित्य पुरस्कार, कृपाल सिंह पवार स्मृति सम्मान मिले हैं। इसके अतिरिक्त दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।