गन्ने में लगातार बढ़ रही लागत, दाम बढ़ने का इंतजार
अजीत चौधरी
बिजनौर। गन्ने के दाम भले ही तीन साल से न बढ़े हों, लेकिन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले तीन साल में ही गन्ने पर लागत दस प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है। लागत बढ़ने के बाद भी किसानों को उनकी फसल के दाम बढ़कर नहीं मिले हैं। गन्ना विभाग द्वारा किए गए सर्वे में इस बार भी गन्ने की लागत बढ़ी हुई आ रही है। लगातार तीन साल से दाम न बढ़ने के बाद किसानों को चुनावी साल में दाम बढ़ने की आस है।
गन्ना जिले के किसानों की मुख्य फसल है। किसान गन्ने की पैदावार ज्यादा से ज्यादा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। इस समय भी किसान गन्ने की फसल में लागत लगाने और मेहनत करने में लगे हुए हैं। ये हाल तब है जब गन्ने की फसल के दाम लगातार तीन साल से नहीं बढ़ाए गए हैं। प्रशासन द्वारा फसलों पर आने वाली लागत का एक मोटा मोटा खाका तैयार किया जाता है। इसमे पेट्रोल-डीजल, उर्वरकों पर आने वाली महंगाई और बढ़े श्रम को देखकर यह तय किया जाता है कि उक्त साल में फसल में कितनी लागत आएगी। फिर इस लागत के हिसाब से उक्त फसल के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर जमीन के हिसाब से मिलने वाली राशि तय की जाती है। इसे फसलों का वित्तमान कहते हैं। इस वित्तमान के आधार पर ही फसलों के दाम किसानों को मिलने चाहिए, लेकिन गन्ना बोने वाले किसानों के साथ ऐसा नहीं हो रहा है। गन्ने की लागत लगातार तीन साल से बढ़ रही है, लेकिन कीमतों में कोई इजाफा नहीं हो रहा है। हालांकि ये चुनावी साल है और अबकी बार किसानों को दाम बढ़ने के पूरे आसार लग रहे हैं।
गन्ने की फसल पर आने वाली लागत
खेत की तैयारी 2019 2020 2021
खेत जुताई 8400 9000 9600
पाटा लगाना 3000 3200 3400
बीज कीमत 19500 19500 19500
बीज तैयारी लागत 4680 4680 4680
जैविक उर्वरक 15000 16250 17500
बुआई पर श्रम 8000 8080 8080
सिंचाई पर व्यय
दिहाड़ी मजदूरी 1400 1414 1414
सात सिंचाई 8500 10500 11000
निराई-गुडाई 15000 15000 15000
रासायनिक उर्वरक व्यय
जिंक 1800 1800 2550
डीएपी 4200 4025 4200
पोटाश 1800 1880 1880
यूरिया 1950 1924 1924
कीटरोग रसायन 7000 7500 7500
छिलाई व्यय 32000 34380 38921
ढुलाई 20000 21488 21623
अन्य व्यय 2000 2000 2000
फसली ब्याज 9526 9526 9526
कुल खर्च 163756 172147 180298
नोट: खर्च प्रति हेक्टेयर के हिसाब से है। उत्पादन 80 क्विंटल प्रति बीघा माना गया है।
चार सालों में गन्ने के दाम पछेता गन्ना अर्ली गन्ना
2017-18 315 325
2018-19 315 325
2019-20 315 325
2020-21 315 325
2021-22 -- --
नोट: (दाम प्रति क्विंटल की दर से हैं।)
सर्वे के बाद भी नहीं बढ़ रहा मूल्य
भाकियू युवा के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने बताया कि गन्ने की लागत सरकारी सर्वे में भी बढ़ रही है और सरकार दाम एक रुपये नहीं बढ़ा रही है। गन्ने का दाम कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित होना चाहिए।
लागत कहीं ज्यादा
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार के अनुसार गन्ने की पैदावार भले ही बढ़ी है लेकिन इसमें लागत भी बहुत आ रही है। किसानों की लागत सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। गन्ने का दाम कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए।