तीन साल में एक भी बेरोजगार ने नहीं कराया अपना पंजीकरण
बिजनौर। डाक विभाग और श्रम रोजगार मंत्रालय के बीच हुए करार की जनपद में हवा निकल गई। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2017 में डाकघरों में शुरू की गई रोजगार पंजीकरण की योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है। आलम ये है कि पिछले तीन साल में एक भी बेरोजगार ने प्रधान डाकघर में अपना पंजीकरण नहीं कराया है। शायद प्रचार-प्रसार की वजह से यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई, जिससे बेरोजगार युवाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
लगभग तीन साल पहले श्रम मंत्रालय और डाक विभाग के बीच समझौता हुआ था कि डाकघरों में नेशनल कैरियर सर्विस पोर्टल (एनसीएस) पर बेरोजगारों पंजीकरण कराया जाना था। सबसे पहले इसकी शुरुआत प्रधान डाकघर में होनी थी। इसके बाद अन्य उप डाकघरों में भी यह काम किया जाना था, लेकिन तीन वर्ष में एक भी बेरोजगार का पंजीयन अपडेट नहीं हो सका है।
जिला मुख्यालय पर स्थित प्रधान डाकघर में एक अप्रैल 2017 से रोजगार पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई थी। सेवायोजन कार्यालय पर रोजगार पंजीयन का बोझ कम हो इसके लिए ही प्रधान डाकघरों में रोजगार पंजीयन की सुविधा संचालित की गई थी। उस समय प्रधान डाकघर में इसका काउंटर भी संचालित किया गया था। यहां पर रोजगार के लिए बेरोजगारों का पंजीयन होना था। प्रधान डाकघर में इस योजना की सफलता के बाद इसका विस्तार उप डाकघरों में भी किया जाना था। इस योजना में आवेदक को पंजीयन कराने के लिए 15 रुपये शासन ने निर्धारित किया था।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रचार-प्रसार के अभाव में यह योजना दम तोड़ गई। इसका समय रहते प्रचार-प्रसार करके बेरोजगार युवाओं को जागरूक किया जाता तो यह योजना परवान चढ़ सकती थी।
प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर लक्ष्मीकांत जोशी ने बताया कि प्रधान डाकघर में एनसीएस पोर्टल पर इस योजना के अंतर्गत एक भी बेरोजगार ने अपना पंजीकरण नहीं कराया। उन्होंने बताया कि इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अलग से कोई बजट नहीं आता है, उन्होंने अपने स्तर से डाकघर में आने वाले युवाओं को जागरूक करने की कोशिश भी की।