सूखने लगी हैदरपुर झील, लौटने लगे मेहमान पक्षी
रजनीश त्यागी
बिजनौर। गंगा का जलस्तर घटा तो हैदरपुर झील भी सूखने लगी। इस समय झील का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सूख चुका है। ऐसे में हजारों किलोमीटर की यात्रा कर सर्दियों की शुरुआत में आए प्रवासी पक्षी अपने घरों को लौटने शुरू हो गए। बढ़ते तापमान के साथ ही प्रवासी पक्षियों ने अपनी वतन वापसी शुरू कर दी है। गंगा पर देखें तो वहां मौजूद पक्षियों की संख्या में इस समय 50 से 60 प्रतिशत तक कमी देखी जा सकती है। अब मात्र कुछ प्रजाति के ही पक्षी देखने को मिल रहे हैं।
बिजनौर जनपद प्रवासी पक्षियों का शानदार बसेरा माना जाता है। गंगा बैराज समेत जिले में हरेवली बैराज, छितावर झील, जलीलपुर गंगा, विदुरकुटी गंगा क्षेत्र में प्रवासी पक्षी पूरी सर्दी देखे जा सकते हैं। इनमें बिजनौर गंगा बैराज का क्षेत्र, हैदरपुर वेटलैंड पर सबसे ज्यादा संख्या रहती है। यहां पर सर्दियों में हुई गणना में 200 से ज्यादा प्रजाति के 20 हजार से पक्षी देखे गए थे। असल में यहां पर अपने वाले अधिकांश प्रवासी पक्षी पूरे यूरोप से आते हैं। अक्तूबर में वहां जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, प्रवासी पक्षी भारत की ओर आते हैं। अब धीरे-धीरे मौसम बदल रहा है। बढ़ते तापमान के साथ मेहमान पक्षी अब विदाई लेने लगे हैं। पक्षी विशेषज्ञों की माने तो मार्च के अंत तक पक्षियों के जाने का सिलसिला चलता रहेगा और सबसे अंत में बार हेडेड गूज, ग्रे लैग गूज जाएगा। वह काफी लंबे समय तक यहां देखने को मिलते हैं। अब गंगा बैराज पर प्रवासी पक्षियों की संख्या भी घटने लगी है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कोआर्डिनेटर शाहनवाज खान ने बताया कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, पक्षी यहां से जाने लगते हैं। मार्च के अंत या अप्रैल माह के पहले सप्ताह तक अधिकांश पक्षी चले जाएंगे और सर्दी में अक्तूबर में फिर से आने लगेंगे। (संवाद)
इन मेहमान परिंदों से गुलजार रही गंगा
सर्दी के मौसम में बिजनौर गंगा बैराज स्थित हैदरपुर वेटलैंड पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां पर रोजाना दर्जनों पक्षी प्रेमी आते थे और पक्षियों की तस्वीर कैमरे में कैद करते रहे। यहां पर मौरेन, प्रोवाइन, हरनेड, बार हेडेड गूज, कॉमन कूट, प्रोचार्ड, क्रेन, ब्लैक नेक्ड स्टार्क आदि पक्षी देते जाते थे।
जल्दी पानी सूखना बढ़ा रहा चिंता, कुछ ही पक्षी दिख रहे
हैदरपुर वेटलैंड में पानी का मार्च के शुरुआत में ही सूख जाना पक्षी प्रेमियों की चिंता बढ़ा रहा है। ऐसे में यहां से पक्षी जल्दी ही उड़ने लगे हैं और उन स्थानों का रुख कर रहे हैं, जहां पर देर तक पानी ठहरता है। ऐसे में इस समय गंगा पर बार हेडेड गल, ओपन बिल स्टार्क, कॉर्मोरेंट का झुंड दिख रहा है। इसके अलावा पानी बहुत कम होने के कारण दूसरे प्रवासी पक्षियों की संख्या बहुत कम हो गई है। माना जा रहा है कि गंगा में जहां पानी रुका हुआ है, गंगा के ऊपरी और नीचे के इलाकों में पक्षियों के झुंड चले गए हैं।
कुछ माह पहले ही रामसर साइट घोषित हुआ है हैदरपुर वेटलैंड
कुछ माह पहले ही हैदरपुर वेटलैंड को रामसर साइट का दर्जा मिला था। पिछले तीन साल से चल रही गणना और प्रयासों के बाद यह उपलब्धि मिल सकी थी। इस क्षेत्र में पक्षियों की बात करें तो बिजनौर गंगा बैराज की अपस्ट्रीम में सर्दियों में पक्षियों का बड़ा बसेरा रहता है। फिर चाहे वह हैदरपुर वेटलैंड हो या फिर बिजनौर रावली बंधे के पास का गंगा क्षेत्र, सभी जगह नवंबर से मार्च तक प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है। गंगा का करीब यह दस किलोमीटर का ऐसा क्षेत्र है, जिसे वेटलैंड की श्रेणी में रखा गया है।
कहां से आते हैं पक्षी
प्रवासी पक्षी अक्सर यूरोपियन देशों से आते हैं। पक्षी विशेषज्ञों की माने तो जब यूरोपियन देशों में ठंड बढ़ती है और पक्षियों को खाने की कमी होने लगती है, ये एशियाई देशों की ओर रुख करते हैं। भारत में भी यह पक्षी दक्षिण भारत तक जाते हैं। बिजनौर जिले की बात करें तो यह स्थान पक्षियों के लिए बेहतरीन बसेरा है।
वर्जन...
मार्च शुरू होते ही प्रवासी पक्षी लौटना शुरू कर देते हैं। झीलों में पानी घटने से पक्षियों ने पहाड़ी राज्यों का रुख कर लिया है, जहां अभी तापमान कम है। पक्षी बीच-बीच में ठहरते हुए वापस जाएंगे। सबसे पहले दक्षिण भारत से पक्षी वापस आने शुरू होते हैं।
- डॉ. अनिल सिंह, वरिष्ठ पक्षी वैज्ञानिक, जूलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, देहरादून
बिजनौर में गंगा बैराज पर गंगा में मस्ती करते ब्लैक हेडेड गल पक्षी।- फोटो : BIJNOR
बिजनौर में बैराज के पास हैदरपुर वेटलैंड की झील में बैठे एशियन ओपन बिल स्टार्क पक्षी।- फोटो : BIJNOR
बिजनौर में गंगा बैराज पर गंगा किनारे बैठे एशियन ओपन बिल स्टार्क पक्षी।- फोटो : BIJNOR
बिजनौर में गंगा बैराज के ऊपर उड़ते पक्षी।- फोटो : BIJNOR