उपेक्षा के चलते शुरू नहीं हुआ सौ बेड का अस्पताल
धामपुर। क्षेत्रवासियों का कहना है कि शासन, प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की घोर उपेक्षा के कारण एक साल बाद भी करीब 37 करोड़ की लागत से तैयार हुआ सौ बेड का अस्पताल शुरू नहीं हो सका है। यदि यह अस्पताल शुरू हो गया होता बहुत लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
साल 2016 में सरकार की ओर से हाईवे 74 पर चकशहजानी गांव के पास 37 करोड़ की लागत से सौ बेड का अस्पताल बन रहा है। यह अस्पताल एक साल पहले बन कर तैयार हो गया है। लेकिन लोगों की मांग करने के बाद भी अस्पताल को शुरू कराने की कोशिश नहीं हुई। जिससे कोरोना महामारी में संक्रमित हुए लोगों का उपचार कराना मुश्किल हो रहा है। प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में मरीजों का परीक्षण कर उपचार करने का काम बंद कर दिया है। केवल कोरोना टेस्ट किया जा रहा है।
क्या कहते हैं क्षेत्र के लोग
सरकार में इच्छा शक्ति नहीं : संजीव
क्षेत्र के संजीव कुमार का कहना है कि सरकार में जनहित के कार्य करने की इच्छाशक्ति नहीं है। यही वजह है कि अब तक अस्पताल को चालू नहीं कराया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बने ट्रामा सेंटर को भी शुरू नहीं कराया जा सका है। यदि यह दोनों चालू हो गए होते तो बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलतीं।
जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया : छतरपाल सैनी
न्यू हिंदू कॉलोनी निवासी छतर पाल सैनी का कहना है कि सरकार ने ट्रामा सेंटर और सौ बेड के अस्पताल को शुरू न करके अच्छा संदेश नहीं दिया है। इससे यह लगता है कि सरकार ने कोरोना महामारी के चलते जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया।
किसी भी स्तर से नहीं हुआ प्रयास : अशोक
अशोक कुमार अग्रवाल का कहना है कि यह डीएम, सीएमओ और स्थानीय विधायकों और सांसदों की कमी है। इन लोगों ने इन दोनों अस्पतालों को चालू कराने को कोई प्रयास ही नहीं किया है। यदि किया गया होता, तो आज यह दुर्दशा न होती है।
भरोसा देने के बाद भी सिस्टम फेल: डॉ. रविंद्र
डॉ. रविंद्र भारद्वाज का कहना है कि उनके स्तर से जनहित के मुद्दों को उठाया गया। शासन और प्रशासन को सचेत किया गया। लेकिन भरोसा देने के बाद भी किसी ने कुछ नहीं किया। जिसका नतीजा जनता के सामने है।
सरकार से मांगा जाएगा जवाब : गिरीशचंद सांसद नगीना
नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीश चंद का कहना है के वह सीएचसी के ट्रामा सेंटर और सौ बैड के अस्पताल को शुरू कराने को सदन में मुद्दे के रूप में कई बार उठा चुके हैं। लेकिन यह गूंगी , बहरी सरकार सुनने के बाद भी काम नहीं कर रही। भरोसा दिया कि वह इन मुद्दों को फिर से सदन में उठा कर सरकार से जवाब मांगेंगे।