कैसे होगी आगे की पढ़ाई, सताने लगी चिंता
बिजनौर। यूपी बोर्ड का रिजल्ट आए तीन दिन हो गए हैं। अभिभावक और विद्यार्थी शानदार परिणाम पर जश्न मना रहे हैं। परंतु समय बीतने के साथ ही उन्हें आगे की पढ़ाई की चिंता सताने लगी है। अभिभावकों को यह डर भी सता रहा है कि कहीं कोरोना के कारण यह सत्र जीरो न हो जाए। इससे बच्चों की पढ़ाई का क्रम टूट जाएगा। विद्यार्थियों के सामने मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि की प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग का संकट गहराने लगा है। यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट का रिजल्ट 27 जून को आ गया। रिजल्ट के बाद किसी बच्चे का आईएएस बनने का सपना है तो कोई इंजीनियर व डाक्टर बनना चाहता है। अभिभावकों ने भी अपने बच्चों की प्रतियोगी परीक्षा के लिए पहले ही योजना बना ली थी। कोई रिजल्ट आने के बाद बच्चे को दिल्ली भेजना चाहता था तो कोई कोटा भेजने की तैयारी कर रहा था। परंतु कोरोना ने अभिभावकों की सारी योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है। अभिभावक इस असमंजस में हैं कि वे अब क्या करें।
बेटे को घर ही कराएंगे ऑनलाइन तैयारी
जयद्रथ सिंह अफजलगढ़ ब्लाक के गांव जिगरवाला के रहने वाले हैं। उनके बेटे वैभव प्रताप ने इंटरमीडिएट में जिला टॉप किया है। वह हाईस्कूल में भी जिला टॉपर था। उसका लक्ष्य आईएएस बनना है। वह बेटे का बीएससी में दिल्ली यूनिवर्सिटी में पंजीकरण करा रहे हैं। परंतु कोरोना का प्रकोप है, पढ़ने नहीं भेजेंगे। माहौल सामान्य होने तक घर पर ही ऑनलाइन तैयारी करेगा।
कोचिंग के लिए दिल्ली या कोटा भेजना था
ब्रजमोहन सिंह की बेटी राशि ने 82.8 अंक हासिल किए हैं। वह इंजीनियर बनना चाहती है। कोचिंग के लिए दिल्ली या कोटा भेजना था। सारी योजना बना रखी थी। परंतु कोरोना से योजना अमल में आती नहीं दिख रही है। बच्चे का स्वास्थ्य जरूरी है, स्थिति नार्मल होने पर भेजेंगे।
स्थिति सामान्य होने का है इंतजार
अफजलगढ़ निवासी त्रिमोहन सिंह की बेटी तनु के 82 फीसदी अंक हैं। पहले से ही बारहवीं की पढ़ाई के साथ इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही है। रिजल्ट आने के बाद उसे बाहर भेजना था। कोरोनो ने सब कुछ थाम दिया है। अब घर पर ही पढ़ाई शुरू कर दी है, स्थिति सामान्य होने पर देखेंगे क्या करना है।
बेटा बनना चाहत है डॉक्टर, तैयारी कहां कराएं
स्योहारा के उबैद अख्तर इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। बेटा नवाज अख्तर 76.2 प्रतिशत अंक लाया है। डाक्टर बनना चाहता है। उबैद अख्तर ने बताया कि बेटे ने नीट परीक्षा का फार्म पहले ही भर रखा है। तैयारी के लिए दिल्ली भेजना था। कोरोना के कारण उलझन में हैं। ऐसे में बाहर भेज नहीं सकते। कोचिंग संस्थानों में ऑनलाइन प्रवेश भी नहीं हो रहे हैं।
घर पर ही नहीं संसाधन, बाहर भेज नहीं सकते
हल्दौर ब्लॉक के गांव पावटी निवासी ओमपाल सिंह की पंक्चर की दुकान है। बेटे नवनीत ने 82 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। बेटे को डाक्टर बनाने का सपना है। इसकी तैयारी के लिए बाहर भेजना था। इसके लिए पैसे भी जोड़ लिए थे। कोरोना में कुछ समझ में नहीं आ रहा है। उनके पास घर पर तैयारी करने के संसाधन भी नहीं है। ऐसे में बाहर तो नहीं भेजना है।
यहीं किसी कॉलेज में दिलाएंगे दाखिला
हरपाल सिंह के पुत्र अभिषेक यादव ने 77 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। आईएएस बनना चाहता है। कोरोना के कारण बाहर भेजा नहीं जा सकता है। बताया कि अब तो मजबूरी में आसपास के डिग्री कॉलेज में बीएससी में प्रवेश दिलाना होगा।
एनडीए की कोचिंग के लिए जाना था दिल्ली
नूरपुर निवासी विनीत शर्मा अपने मौसा सुधीर शर्मा के पास रहता है। सेना में अफसर बनना चाहता है। एनडीए की कोचिंग के लिए दिल्ली जाना था। तैयारी पूरी थी। कोरोना संकट से परेशानी में है। बताया कि स्थिति सामान्य होने पर तैयारी करने बाहर भेजेंगे।
त्रिमोहन सिंह।- फोटो : BIJNOR
जयद्रथ सिंह।- फोटो : BIJNOR
सुधीर शर्मा।- फोटो : BIJNOR
उबैद अख्तर।- फोटो : BIJNOR
ओमपाल सिंह।- फोटो : BIJNOR
हरपाल सिंह।- फोटो : BIJNOR