हिंदी है राष्ट्र के माथे की बिंदी
बिजनौर। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में हिंदी के स्वरूप पर चर्चा की गई। वेबिनार में जनपद में जिला पूर्ति अधिकारी के पद पर कार्यरत मनीष कुमार ने कहा कि हिंदी को लेकर हमें मानसिकता बदलनी होगी।
उन्होंने कहा कि कई बार कई अभिभावक गर्व से बताते हैं कि मेरा बच्चा हिंदी में कमजोर है ,यह सोच बदलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वे कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई हिंदी भाषी राज्यों में गए हैं, लेकिन कभी भी संवाद की कमी महसूस नहीं हुई।
वेबिनार में रिटायर्ड अध्यापक अशोक कुमार त्यागी ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व छात्रों को हिंदी में मजबूत बनाना है। किताबी शिक्षा के अतिरिक्त भी हिंदी के बारे में पढ़ाना चाहिए।
अग्रसेन विद्यालय नगीना की प्रधानाचार्य शाकुंभरी देवी का मानना है कि हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए छात्र-छात्राओं को कविताओं और कहानियों से जोड़ने की आवश्यकता है। कविताओं और कहानियों के माध्यम से बच्चे हिंदी साहित्य की ओर भी आकर्षित होते हैं।
एचएम पब्लिक स्कूल बिजनौर में हिंदी अध्यापिका रेनू चौधरी का कहना है कि हिंदी राष्ट्र के माथे की बिंदी है। हिंदी संपूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करती है। आजादी से पूर्व तथा आजादी के पश्चात हिंदी ऐसी भाषा रही कि गुजराती भाषा गांधी जी को भी हिंदी का महत्व समझना पड़ा।
शिक्षाविद डॉ. कृष्ण देव आर्य ने कहा कि बच्चों पर मातृभाषा का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। हमें बच्चों के बाल मन को समझना चाहिए और उसमें हिंदी के प्रति श्रद्धा का भाव जगाना चाहिए। यदि हम बाल मन में हिंदी की लौ जला पाएंगे तब हिंदी के साथ-साथ भारतीय संस्कृति भी समृद्ध होगी। ‘हिंदी हैं हम’ जैसे कार्यक्रम निरंतरता के साथ होते रहने चाहिए ,इससे भी अभिभावकों और बच्चों की हिंदी के प्रति सोच में भारी परिवर्तन आ रहा है।