हल्दौर। गांव पैजनियां निवासी दुकानदार मोहम्मद फारूख खां के सामने उसकी नेत्रहीनता अभिशाप न बन सकी। फारूख हाथों से छूकर रुपये, पैसों की जांच कर दुकान का संचालन करते हैं। परिजनों के अनुुसार फारूख के कंधों पर ही उनके परिवार की गुजर बसर का दायित्व है। फारूख हिम्मत हारने वाले लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
गांव पैजनियां निवासी मो. फारुख खां (50) ने बताया कि शादी के कुछ वर्ष बाद ही किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। नेत्रहीन फारूख ने बताया कि परिवार में उनकी पत्नी, तीन पुत्र, एक पुत्री है। वह पिछले कई वर्षों से अपने घर पर राशन की दुकान कर रखी है और आमदनी से ही वेपरिवार की रोजी रोटी चलते हैं। फारूख ने बताया कि सरकार से आर्थिक मदद के नाम पर हर महीने मात्र 500 रुपये मिलते हैं। परिवार के पालन-पोषण का जिम्मा अकेले उनके कंधे पर है। कहा कि छूकर वे नोट और सिक्कों की पहचान कर लेते हैं।
यही नहीं उन्होंने बताया कि वह अपनी दुकान में ग्राहक को तौल कर वह सामान देते हैं। इतना ही नहीं वह दुकान के लिए खुद ही शहर से सामान खरीदकर लाते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा सपना सभी बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा करना है।
एक ओर जहां कुछ लोग नेत्रहीन की बेबसी का रोना रोकर अपने सपने को साकार नहीं कर पाते और निराश होकर बैठ जाते हैं। ऐसे में हिम्मत हारने वाले लोगों के लिए वे प्रेरणा स्रोत हैं।