जल्दबाजी पड़ी भारी, लागत पूरी, रिकवरी आधी
बिजनौर। कोल्हुओं के संचालन में की गई जल्दबाजी कोल्हू संचालकों को भारी पड़ रही है। इस बार कोल्हू का संचालन बाकी सालों के मुकाबले बहुत पहले कर दिया गया है। खेतों में खड़ा गन्ना अभी कच्चा है। उससे मिठास की रिकवरी आधी ही निकल रही है। रिकवरी आधी निकलने से कोल्हू संचालकों को गुड़ बनाने में चीनी इस्तेमाल करनी पड़ रही है। ऐसा कई सालों बाद हुआ है कि चीनी के दाम गुड़ से इतने कम हैं कि चीनी से गुड़ बनाया जा रहा है।
लॉकडाउन के दौरान जनता ने अपनी जीवन शैली में परिवर्तन किया है। मीठे में चीनी की जगह धीरे धीरे गुड़ लेता जा रहा है। इससे गुड़ के दाम लॉक डाउन में भी कम नहीं हुए थे। अब भी गुड़ के दाम 3600 रुपये प्रति क्विंटल हैं। गुड़ के दामों को कैश करने के लिए कोल्हुओं के चक्के सितंबर के शुरूआत में ही घूमने शुरू हो गए थे। पूरे जिले में दर्जनों कोल्हुओं का संचालन शुरू हो चुका है। कोल्हू मालिकों ने कोल्हू तो चला लिए लेकिन अब उन्हें गलती का अहसास हो रहा है। खेतों में खड़ा गन्ना कच्चा है, गन्ने से 12 से 13 किलो मिठास निकलती है, लेकिन गन्ना कच्चा होने की वजह से मिठास आधी ही निकल रही है। गन्ने में इस समय मिठास कम है और पानी ज्यादा है। इस वजह से कोल्हुओं पर गुड़ बनाने में चीनी का इस्तेमाल किया जा रहा है। गुड़ के दाम अच्छे होने की वजह से रिकवरी कम होने पर भी गन्ने के दाम 250 रुपये प्रति क्विंटल तक दिए जा रहे हैं। गन्ना पकने पर रिकवरी बढ़ जाएगी तो कोल्हू मालिकों को अलग से चीनी नहीं डालनी होगी। इससे फायदा होना शुरू हो जाएगा।
ऐसे मिलती है रिकवरी
गन्ने में दो तत्व होते हैं ग्लूूकोज और सुक्रोज। ग्लूकोज गन्ने के अंदर मिलने वाले पानी को कहते हैं और सुक्रोज मिठास को। सुक्रोज से ही चीनी और गुड़ बनता है। ग्लूकोज से गन्ना अपनी खुराक लेता है। गन्ने में सुक्रोज बरसात के मौसम के बाद बनना शुरू होता है। अगर बरसात ज्यादा हो, बरसात या कोहरे की वजह से धूप न निकले तो गन्ने का पौधा सुक्रोज को ग्लूकोज में परिवर्तित करके अपनी अपनी खुराक प्राप्त करता है।
ऐसे बन रहा चीनी से गुड़
गुड़ से जब रस निकलता है तो उसे छानकर पकाया जाता है। फिर उसे एक दूसरी चाक में डालकर पकाया जाता है। इस समय चाक में गन्ने के 35 किलो रस के साथ 15 किलो चीनी भी डाली जा रही है। इससे 50 किलो गुड़ बन रहा है। चीनी के दाम कम होने की वजह से कोल्हू मालिक इस चीनी से गुड़ बनाने में परहेज नहीं कर रहे हैं।
अभी रिकवरी बढ़ने में लगेगा समय
कोल्हू स्वामी राकेश सैनी ने बताया कि गन्ना अभी कच्चा है। गुड़ के दाम अच्छे होने व प्रतिस्पर्धा की वजह से कोल्हू जल्दी चलाना पड़ गया। करीब दस से 12 दिन में गन्ना पक जाएगा और रिकवरी बढ़ जाएगी। तब गुड़ बनाने में लागत कम हो जाएगी।