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प्रभु यीशु के जन्म पर गाए खुशी के गीत, थाली बजाई

Sat, 26 Dec 2015 12:45 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर में क्रिसमस का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। चर्च में प्रार्थना आयोजित की गई। सेंटा क्लॉज ने बच्चों को टॉफी और गिफ्ट वितरित किए। सभी ने एक दूसरे को क्रिसमस की बधाई दी।
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तेरा प्रेम कैथोलिक चर्च में बच्चों ने प्रभु यीशु का जन्मस्थल चरनी बनाया। फादर विजू सिवेस्टियन ने बृहस्पतिवार रात दस बजे प्रेयर कराई। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु ने मानवता को शांति और प्रेम का संदेश देने के लिए जन्म लिया। उन्होंने कहा कि जब प्रभु यीशु पैदा हुए तो उस रात आकाश में एक दिव्य सितारा चमका। प्रभु यीशु के दर्शन करने आए तीन ज्योतिषियों का मार्गदर्शन भी उस सितारे ने ही किया। प्रभु यीशु के जन्म से पहले या बाद में यह सितारा अब तक नहीं चमका हैं। प्रार्थना के बाद केक बांटा गया। इस दौरान दिनेश मसी, सिस्टर फोंसी, सिस्टर करुणा और जिंसिटा आदि मौजूद रहे।


सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च में फादर एलिप्रिंस ने प्रेयर कराई। उन्होंने बताया कि प्रभु यीशु ने कहा था कि उन्होंने पापियों और गरीबों के उद्धार के लिए जन्म लिया था। उन्होंने कहा कि नए कपड़े पहनकर चर्चा में जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करना क्रिसमस हैं। चर्च में सेंटा क्लॉज बने विशाल ने बच्चों को टॉफी और गिफ्ट वितरित किए।  चर्च में अनुराग नाथ, अमित नाथ, एकता, सोनू, अलका, सीमा, पिंकी आदि मौजूद रहे।
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नजीबाबाद। संतोमालन स्थित मेथोडिस्ट चर्च में पादरी फादर आशीष की देखरेख में कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभु की प्रार्थना से हुआ। फादर आशीष ने कहा कि मानव कल्याण के लिए परमात्मा स्वयं मानव रूप में आज धरती पर अवतरित हुए थे। श्रद्धालुओं ने कैरोल गीत का गायन कर और सफेद मोमबत्तियां जलाकर प्रभु यीशु को नमन किया। कार्यक्रम में इमेरवल थॉमस, सेमियल चंद्रा, रजनीश, राकेश प्रसाद, बीना, विनीता, माया प्रसाद आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे। उधर, सेंट मेरीज चर्च में फादर जोशी थॉमस की देखरेख में क्रिसमस पर्व पर विशेष प्रार्थना की गई।
चावरा सेवा समाज की ओर से क्रिसमस पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान इंद्रप्रताप चौहान, संस्था के निदेशक फादर मैथ्यू ने प्रभु यीशु के जन्म संदेश पर विचार रखे। कोऑर्डिनेटर हरेंद्र कुमार की देखरेख में केक काटा गया। शिक्षिका पूनम और पूजा के निर्देशन में बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रमों से भावविभोर किया।
इंपीरियल इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित क्रिसमस मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथि एसडीएम वीके श्रीवास्तव ने किया।चेयरमैन ओमप्रकाश राजपूत, प्रबंध निदेशक अशोक राजपूत रहे। बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से आकर्षण की छटा बिखेरी। मेले में मनोरंजन, खाद्य व्यंजन की स्टॉल्स ने अपनी ओर आकर्षित किया। बच्चों ने मिकी माउस जंप, झूलों आदि का लुत्फ उठाया। सेंटा क्लॉज ने मेले में आए लोगों को टॉफी आदि देकर क्रिसमस की बधाई दी।


धामपुर। गांव सुहागपुर स्थित गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में क्रिसमस डे धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान ईसा मसीह को याद किया गया। फैंसी ड्रेस और मेंहदी प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। फैंसी ड्रेस में तलहा जीसस, भावना मैरी, बुशरा मालन, अर्श पानवाला, सृष्टि और सुहानी ने राम सीता, अली जोकर, पार्थ सुभाषचंद बोस की वेशभूषा में आकर्षण का केंद्र रहे। मेहंदी प्रतियोगिता में अक्षिता, अंशुल, तसनीम और काजल ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं। सेंटा क्लॉज बने बच्चों ने दर्शकों को बिस्कुल, टॉफी और चॉकलेट बांटकर क्रिसमस डे की बधाई दी। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. मदन सिंह रावत आदि रहे ।
अमेेरिकन किड्स स्कूल में कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नीरजा सिंह ने  मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरूआत भी की। कार्यक्रम में प्रधानाचार्या प्रियंका शर्मा, तानिया शर्मा, नरेंद्र चौधरी रहे। बाल कलाकार शौर्य ने सिंथेसाइजर पर संगीतमय प्रस्तुति सुनाई। उधर सेंट  मेरीस स्कूल में भी देश की खुशहाली के लिए स्कूल की शिक्षिकाओं और प्रबंधन ने विशेष पूजा अर्चना की।


राजा का ताजपुर। ताजपुर स्थित गिरजाघर में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर चर्च में विशेष प्रार्थना सभा की गई। क्रिसमस पर गिरजाघर को बिजली की झालरों से सुंदर ढंग के साथ सजाया गया। गिरजाघर को देखने के लिए पूरे दिन भारी भीड़ लगी रही। राजा का ताजपुर स्थित सेक्रेड हार्ट चर्च का निर्माण वर्ष 1913 में राजा श्याम सिंह रिख और उनके भाई   शिवनाथ सिंह रिख ने अपनी ईसाई पत्नियों मारग्रेट मेरी एवं विलियम मेरी की पूजा अर्चना के लिए कराया था।


ताजपुर में कड़ूला नदी के किनारे लगभग 12 एकड़ भूमि में बने गिरजाघर की अपनी बनावट और सुंदरता के लिए एशिया में विशिष्ट पहचान है। राजा श्याम सिंह रिख की मृत्यु के बाद उनके वंशजों ने गिरजाघर को ईसाई मिशनरियों को सौंप दिया।
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