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कोरोना के मरीजों को मार रहा हैप्पी हाइपोक्सिया

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कोरोना के मरीजों को मार रहा हैप्पी हाइपोक्सिया
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बिजनौर। हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना संक्रमित मरीजों के जीवन की डोर तोड़ रहा है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी गाइड लाइन का उल्लंघन लोगों पर भारी पड़ रहा है। यह पहले से किसी भी संक्रमण से ग्रस्त लोगों के लिए जानलेवा हो रहा है। ऐसे लोग हैप्पी हाइपोक्सिया (शरीर में ऑक्सीजन की कमी) का शिकार हो रहे हैं, लेकिन उन्हें इसका आभास नहीं हो रहा है।
बृहस्पतिवार की रात तक जिले में कुल 2896 कोरोना संक्रमित मरीज पाए जा चुके हैं। इसी के साथ संक्रमण से मृत्यु दर में भी काफी इजाफा हुआ है। अब तक कोरोना जिले के 38 लोगों की मौत हो चुकी है। अस्पताल पहुंचने पर हैप्पी हाइपोक्सिया पीड़ितों को बचाने के लिए चिकित्सक जब तक उपाय करते हैं, तब तक उनकी सांसें थम जाती हैं। सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव ने बताया कि कोरोना से मरने वाले लोगों में से 20 प्रतिशत की मौत हैप्पी हाइपोक्सिया के कारण हुई है। उन्होंने बताया कि बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों में इसका खतरा ज्यादा है। आइएमए के अध्यक्ष डॉ. सुभाष राणा ने कहा कि हैप्पी हाइपोक्सिया से बचने के लिए लोगों को दिन में तीन बार ऑक्सीमीटर से शरीर में ऑक्सिजन लेबल चेक करना चाहिए। इसमें देर से पता चलता है और किसी बीमारी में सांस संबंधी बीमारी में दम घुटना शुरू होने लगता है, जल्दी ही बीमारी का पता चल जाता है।
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क्या होता है हैप्पी हाइपोक्सिया
सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव के अनुसार ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में ऑक्सीजन के पर्याप्त स्तर की आपूर्ति नहीं हो पाती। इस स्थिति को हाइपोक्सिया के रूप में जाना जाता है। ऑक्सीजन की कमी होने से अंग अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाते हैं। इससे मरीज की मृत्यु हो जाती है। कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ. पीआर नायर बताते हैं कि स्वस्थ मनुष्य में ऑक्सीजन का स्तर 95 फीसदी होता है, लेकिन कोरोना संक्रमण के जो मामले सामने आ रहे हैं उनमें यह स्तर 70 से 80 फीसदी ही है। कुछ में तो यह 50 फीसदी से भी कम है। उनके मुताबिक ऐसे में शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है और रिएक्शन के तौर पर कार्बनडाई ऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है। यह स्थिति काफी घातक है।
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देखने में पूरी तरह स्वस्थ लगते हैं मरीज
जिला अस्पताल के जनरल फिजीशियन डॉ. राधेश्याम वर्मा ने बताया कि फेफड़ों में सूजन आने पर ऑक्सीजन आसानी से रक्त में नहीं मिल पाती है और यह जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीज देखने पर बिल्कुल ठीक नजर आते हैं। जब रक्त ऑक्सीजन का स्तर गिरता है, तो शरीर सामान्य रूप से बढ़ते कार्बनडाई ऑक्साइड के स्तर पर प्रतिक्रिया करता है, जैसे कि सांस की तकलीफ, या यहां तक कि बेहोशी। हालांकि, कोरोना के मरीजों में इस स्थिति को देखना चौंकाने वाला भी है और परेशान करने वाला भी। अगर डॉक्टर ब्लड ऑक्सीजन की जांच न करें, तो मरीज बिल्कुल ठीक नजर आता है और ये तब तक पता नहीं चलता जब तक कार्डियेक अटैक न आए। इससे मरीज की जान भी जा सकती है।
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