आम बजट से कहीं खुशी, कहीं गम
नजीबाबाद। आम बजट के दौरान शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, विकास के साथ रोजगार को लेकर नागरिकों में उत्सुकता बनी रही। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा पेश आम बजट में टैक्स सीमा में छूट देने, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और कृषि के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने का आम लोगों ने स्वागत किया है।
अतुल रुहेला व जोगेंद्र सिंह का कहना है कि आम बजट में शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विदेशी निवेश का रास्ता साफ किया। ऑप्टिक फाइबर से देश की एक लाख ग्राम पंचायतें को जोड़े जाना ऐतिहासिक कदम है।
अक्षय रुहेला व नीरज सैनी का कहना है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य के साथ सरकार ने किसान हित में कई नई योजनाओं को श्रीगणेश किया है। बिजली के बिल से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार ने किसानों को सोलर पंप मुहैया कराने की योजना तैयार की है।
रजत शर्मा व मो.आदिल का कहना है कि आम बजट के माध्यम से केंद्र सरकार ने आर्थिक मंदी को मात देने के लिए 10 प्रतिशत आर्थिक विकास दर पाने के लक्ष्य तक पहुंचने वाला बजट तैयार किया है।
राहुल राजपूत ने आम बजट को चुनाव बजट बताते हुए रोजगार के हिसाब से खोखला बताया। कहा युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार ने कोई ठोस योजना पेश नहीं की है।
किसान देवेंद्र सिंह का कहना कि बजट के माध्यम से केंद्र सरकार ने किसानों को बेहतरी के लिए कई योजनाएं चलाई है। सोलर पंपों के माध्यम से किसानों को जल मुहैया कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की ओर सरकार ने अच्छी सोच रखी है। वहीं जनधन योजना से किसानों का मान बढ़ाया है।
किसान चौधरी विजय सिंह का कहना है कि आम बजट में किसानों के लिए कुछ भी नया नहीं है। बजट से किसानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं होगा।
दंत चिकित्सक शालिनी अरोड़ा का कहना है कि बजट में महिला कल्याण के लिए 28600 करोड़ रुपये की धनराशि का लक्ष्य रखा है। इससे महिला हितों की योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापारी शहाबुद्दीन राईन का कहना है कि बजट में करदातों को नए टैक्स या पुराने टैक्स से कर अदा करने का वैकल्पिक रास्ता देकर उलझन में डाल दिया है। उन्होंने पुराने टैक्स की सीमा कम करने पर संतोष व्यक्त किया।