खेतों में दौड़ रहा खुलेआम
गुलदार को बहुत शर्मिला वन्यजीव माना जाता है। इंसानों की आहट होते ही गुलदार खेतों में भाग जाता है। रात को ही ये सक्रिय होता है। लेकिन अफजलगढ़ में गुलदार आए दिन खेतों में भारी संख्या में मौजूद किसानों के सामने ही खेतों में छलांग मारता घूम रहा है। कई जगह गुलदार द्वारा काफी देर तक रास्ते में बैठकर रास्ता जाम करने की भी सूचनाएं मिलती रहती हैं।
खेतों में दिखे गुलदार तो यह करें
- खेतों में काम करने को झुंड में जाएं।
- रात को खेतों पर न रुकें।
- खेत में काम करने से पहले आग जलाएं।
- खेत में शोर मचाएं और तेज आवाज में ध्वनि प्रसारित करें।
- जहां काम करना है वहां एक दिन पहले हांका लगाएं।
ऐसा होता है गुलदार
गुलदार हल्के पीले रंग का होता है। उस पर धब्बे होते हैं। गुलदार अधिकतम 58 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तरा से दौड़ता है। यह एक बार में छह मीटर तक की छलांग मार सकता है। इसका वजन 50 से 90 किलोग्राम तक होता है। मादा गुलदार और नर गुलदार अलग-अलग रहते हैं। यह केवल अपने बच्चों को खतरा होने पर ही इंसानों पर हमला करता है। हालांकि अब गुलदार के छोटे बच्चों पर हमला करने के मामले सामने आ रहे हैं।
स्वभाव में आ रहा परिवर्तन
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार, गुलदारों के स्वभाव में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। अपना प्राकृतिक आवास छोड़ने की वजह से ऐसा हो रहा है।
सहअस्तित्व में रहना सीख रहा गुलदार
शेरकोट के रहने वाले शिकारी सैद बिन आसिफ के अनुसार गुलदारों के स्वभाव में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। गुलदार इंसानों के सहअस्तित्व में रहना सीख रहा है।
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