दीपावली पर बाजार में आए ग्रीन पटाखे, आतिशबाजी से निकलेगा कम धुआं
बिजनौर। दीपावली पर इस बार बाजार में केवल ग्रीन पटाखे आए हैं। इन पटाखों से धुआं कम निकलता है और प्रदूषण भी कम होता है। हालांकि पटाखे छोड़ने में लापरवाही भारी पड़ सकती है। पटाखे छोड़ते समय बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए। जरा सी चूक से चोट लग सकती है।
जिले में हर साल करोड़ों रुपये के पटाखे दीपावली पर बिकते हैं। एनसीआर में पटाखे बैन होने पर वहां के लोग भी जिले से ही पटाखे खरीदकर ले जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार इस बार भी दस करोड़ से ज्यादा कीमत के पटाखे बिकेंगे। गोदामों पर तो पहले से ही पटाखे बिक रहे हैं, जिले में प्रशासन द्वारा चिह्नित स्थानों पर भी पटाखों का बाजार सज गया है। इस बार केवल ग्रीन पटाखे ही बाजार में आए हैं। ग्रीन पटाखे पर्यावरण के मापकों को आधार मानकर बनाए जाते हैं। इनमें आवाज और इनसे निकलने वाले धुएं का स्तर कम होता है। ग्रीन पटाखे बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी लुभा रहे हैं।
पटाखे छोड़ते समय ये बरतें सावधानी
- खुले स्थान पर पटाखे छोड़ें।
- आसपास पराली, पत्ती या गन्ने का खेत न हो।
- अनारी, चकरी में फुलझड़ी से आग लगाएं।
- अनार बम आदि पर कोई बर्तन पत्थर आदि न रखें।
- पटाखों में आग लगाते वक्त एकदम न भागें।
- स्काई शॉट्स वाले पटाखे और रॉकेट खुले आसमान के नीचे छोड़ें।
- छोटे बच्चों के साथ बड़े जरूर रहें।
प्रदूषण पर भी रहेगी नजर
दीपावली पर पटाखे होने से प्रदूषण पर भी नजर रखी जा रही है। पटाखों से प्रदूषण होता ही है। इसके अलावा दिल्ली की फॉग भी जिले में छा जाता है। कुछ दिन पहले बारिश होने से जिले की हवा एकदम साफ है। इस समय हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) करीब 50 है। यह गुणवत्ता सबसे अच्छी मानी जाती है। 100 तक की गुणवत्ता (एक्यूआई) अच्छी रहती है। पिछले साल भी हवा की गुणवत्ता दीपावली के बाद भी अच्छी रही थी।
अस्थमा रोगियों को परेशान करता है धुआं
दीपावली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं अस्थमा रोगियों की सांसें और भारी कर देता है। हवा में नमी होने की वजह से धुआं ऊपर नहीं जा पाता है और नीचे ही घुला रहता है। यह श्वसन तंत्र को प्रभावित करता हैै। दमा के रोगी ही नहीं छोटे बच्चों के लिए भी पटाखों का धुआं काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे अस्थमा रोगियों को सांस लेने में और परेशानी होती है। जिला अस्पताल के फीजिशियन डॉ. एचएम गुप्ता के अनुसार पटाखों से निकलने वाली गैस और धुएं से अस्थमा रोगियों और छोटे बच्चों ही नहीं ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को भी बचना चाहिए।
ये करें अस्थमा के मरीज
- प्रदूषण से बचें और घर में ही रहें।
- चिकनाई वाला खाना खाने से बचें।
- पटाखों के संपर्क में न जाएं।
- बुजुर्ग व कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले धूम्रपान से बचें।
- दवाई लेने में लापरवाही न बरतें।
- मॉर्निंग वॉक पर जाने से बचें।