बिजनौर। भले ही प्रदेश सरकार अस्पतालों में अग्निकांड की हर एक गुंजाइश को खत्म करना चाहती है। मगर जिले का स्वास्थ्य विभाग चैन की नींद सोया है। सरकारी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा से बचाव और मानकों को लेकर कोई फिक्र नहीं है। यह खुलासा फायर ऑडिट में हुआ है। दरअसल जिले के सरकारी अस्पताल शासन के अग्नि सुरक्षा के लिए जांच और मूल्यांकन के मानकों में फेल पाए गए।
अस्पतालों को अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के लिए फायर ऑडिट कराना होता है। अस्पतालों को फायर की एनओसी अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने के बाद ही दी जाती है। सभी सरकारी अस्पतालों में अग्निसुरक्षा उपकरण और सुरक्षा के इंतजाम पूरा करना पड़ता है। खासकर आग बुझाने के उपकरण, धुआं नियंत्रक, फायर अलार्म सिस्टम आदि शामिल हैं। हाल ही में शासन से फायर ऑडिट के आदेश जारी किए गए थे।
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल को भी नहीं मिली एनओसी
मेडिकल कालेज से संबद्ध हो चुके जिला पुरुष चिकित्सालय में यूं तो आग से बचाव के अत्याधुनिक इंतजाम करीब करीब पूरे हो चुके हैं, लेकिन फायर ऑडिट में ये भी खरे नहीं उतरते, क्योंकि इनकी फायर एनओसी की प्रक्रिया भी अभी पूरी नहीं हुई है। अग्नि शमन विभाग सूत्रों की मानें तो जिला पुरुष चिकित्सालय तो क्या एक भी सरकारी अस्पताल सीएचसी-पीएचसी पर अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है। पूर्व के किसी सीएमओ ने इस ओर अपेक्षित ध्यान ही नहीं दिया।
18 सरकारी अस्पतालों का हो चुका निरीक्षण, मिली खामियां
मुख्य दमकल अधिकारी अजय शर्मा ने बताया कि पिछले दिनों अस्पतालों में अग्निशमन के उपकरणों और अन्य उपायों को परखा गया था। इसी क्रम में 18 सरकारी अस्पतालों का भी निरीक्षण किया गया। जिसमें आग से बचाव के उपकरण या अन्य सुरक्षा इंतजामों में खामियां मिली है जो एनओसी में बाधक है। बताया कि 12 सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण चल रहा है।
सभी सरकारी अस्पतालों में अग्निसुरक्षा मानकों को दिखवा रहे हैं। एनओसी के लिए कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। - डाॅ. कौशलेंद्र सिंह, सीएमओ बिजनौर
अभी जिले के किसी सरकारी अस्पताल को फायर की एनओसी नहीं दी गई है। कुछ मानकों की कमी है। मानक पूरे करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयास कर रहा है। मानक पूरे होने के बाद एनओसी दे दी जाएगी। - अजय कुमार शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी बिजनौर