बिजनौर, चांदपुर। नगर स्थित महाभारत कालीन मां काली का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। चैत्र मास के नवरात्रों में बड़ी-बड़ी दूर से श्रद्धालु मंदिर पर आकर पूजा अर्चना कर अपने परिवार की सुख समृद्घि की कामना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। नव-युगल जोड़े मंदिर पर आकर नारियल चढ़ाते हैं तथा अपने गृहस्थ जीवन की सफलता की कामना करते हैं।
बिजनौर रोड स्थित मां काली का मंदिर महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। दान धर्म प्रचारिणी मंदिर सुधार सभा मंदिर कमेटी अध्यक्ष कीर्ति प्रकाश बताते हैं कि प्राचीन काल में पांडव इस मंदिर में आकर मां काली की पूजा अर्चना करते थे। मंदिर परिसर में मां काली की छतरी के रूप में स्थित मंदिर से सटे वट वृक्ष का विशाल तना व लटकी हुई दाड़ियां मंदिर की प्राचीनता को प्रकट करतीं हैं। मंदिर से करीब दो किमी दूर स्थित गांव सैंदवार में कभी द्रोणाचार्य का आश्रम था।
आचार्य यहां कौरव-पांडव को धनु विद्या की शिक्षा देते थे। मंदिर परिसर में मां काली के ठीक सामने मां दुर्गा का मठ है। मंदिर परिसर में मां संतोषी का विशाल मंदिर, शिव परिवार मंदिर, संकट मोचन श्री हनुमान जी की करीब 70 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा व मंदिर, शनिदेव का मंदिर स्थित है। चैत्र मास के नवरात्रों में नौ दिवसीय विशाल मेला लगता है। देवी मंदिर की कमेटी दान धर्म प्रचारिणी मंदिर सुधार सभा द्वारा चैत्र मास के नवरात्रों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरी व्यवस्था की जाती है।
- मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कीर्ति प्रकाश का कहना है कि मां काली का मंदिर महाभारत काल का है। मंदिर की प्राचीनता को मंदिर मठ व विशाल वट वृक्ष दर्शाता है। मान्यता है कि मंदिर पर पांडव मां काली की पूजा अर्चना करते थे। मंदिर परिसर में मां काली व मां दुर्गा के मठ हैं जो बहुत प्राचीन हैं। मंदिर पर चैत्र नवरात्रों में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।
- मंदिर कमेटी सचिव जगत सिंह शर्मा ने बताया कि लोगों की मनोकामना पूरी होती है। लोग बड़ी दूर से आते हैं। मंदिर पर स्थित वट वृक्ष मंदिर की प्राचीनता को दर्शाता है। मंदिर पर पांडव सेना पूजा करने आती थी।
- यह रहेगा नवरात्र कार्यक्रम-
- 08 अप्रैल को शाम पांच बजे रामलीला मैदान से मां भगवती के मंदिर तक निकलेगी मां भागवती की रथयात्रा।
- 09 अप्रैल को प्रथम नवरात्र पर कलश पूजन व प्रसाद वितरण
- 09 से 15 अप्रैल तक शाम सात से प्रभु इच्छा तक देवी भागवत कथा का गुणगान व प्रसाद वितरण
- 16 अप्रैल को दिन में मंदिर पर अष्टमी मेला का आयोजन तथा रात 08 बजे से को विशाल भजन संख्या
- 18 अप्रैल को माता रानी के नगर में डोले की वापसी व प्रसाद वितरण
- 23 अप्रैल को श्री हनुमान जयंती पर आरती व प्रसाद वितरण होगा।