बिजनौर। विश्व कछुआ दिवस पर बात यदि गंगा के कछुओं की करें तो यह बहुत चिंताजनक हालत में हैं। 12 में से 09 प्रजातियों के कछुओं को संकटग्रस्त घोषित कर दिया गया है। वहीं लगातार दवाई और घर में पालने के होने वाली तस्करी ने चिंता और बढ़ा दी है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल हजारों कछुओं की तस्करी होती है। बिजनौर में कई वन वन विभाग तस्करी को कछुओं की बड़ी खेप के साथ पकड़े भी चुका है।
पूरे विश्व में कछुओं की बात करें तो 300 से ज्यादा प्रजाति मिलती हैं। हमारे देश में 29 और उत्तर प्रदेश में 15 प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। इनमें से 12 प्रजातियों के कछुओं को अकेले गंगा में संरक्षण मिला हुआ है।
लगातार होते शिकार व तस्करी के कारण इनकी संख्या घट रही है। हालात इतने चिंताजनक हो चले कि पिछले दस साल से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग कछुआ पुनर्वास अभियान चला रहा है।
इसमें गंगा किनारे खेतों से इनके अंड़े एकत्रित कर हेचरी में उनसे बच्चे तैयार किए जा रहे हैं और फिर उन्हें गंगा में छोड़ा जाता है। बताया कि अब तक दस हजार से ज्यादा कछुओं के बच्चों को दोबारा गंगा में छोड़ा जा चुका है। संवाद