डॉ.संदीप कुमार का कहना है कि शव ले जाने के नाम पर होने वाली ये धोखाधड़ी निंदनीय है और इस तरह के फर्जीवाड़े में चिकित्सकों से हस्ताक्षर करके उन्हें भी फंसाने की कोशिश की जा रही है। पहले भी उनसे इस तरह दो रसीद पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। इस तरह के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की है।
-पहली बार पोस्टमार्टम से शव ले जाने के नाम पर रसीद पर साइन कराने का मामला सामने आया है। लॉगबुक में जांच करने पर इसका खुलासा हो जाता। इस मामले में जरूरी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. अरुण कुमार पांडेय, सीएमएस बिजनौर
दूरी के हिसाब से मिलता है रुपये
शव वाहन ले जाने का काम कंपनी पर रहता है। कंपनी वाहन और चालक नियुक्त करती है। एक शव को ले जाने के लिए सात से दस रुपये प्रति किलोमीटर का किराया लिया जाता है। सड़क और खुद वाहन की हालत के अनुसार किराया निर्धारित किया जाता है। यहां पोस्टमार्टम के बाद शव घर ले जाने की रसीद बनाई गई थी।
यह है नियम
जिला अस्पताल में इमरजेंसी या वार्ड में मरीजों की उपचार के दौरान मौत हो जाती है। इन शवों को ले जाने के लिए ही शव वाहन अधिकृत होते हैं। जिला अस्पताल के पास दो एंबुलेंस हैं, जिनमें शव ले जाए जाते हैं। इस दौरान लॉगबुक में एंट्री होती है। इसके बाद ही भुगतान किया जाता है। अगर कोई शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल आता है तो उसे ले जाने की जिम्मेदारी परिजनों की होती है। यहां पोस्टमार्टम के बाद शव ले जाने की रसीद बनाई गई थी। यह क्या खेल था, इसका पूरा खुलासा जांच के बाद ही हो पाएगा।