बिजनौर। गंगा बैराज बिजनौर के पास सेंक्चुअरि में पेड़ काटने और खनन करने को लेकर एनएचएआई और वन अफसरों के बीच विवाद थम नहीं रहा है। वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने दो मंडल के अफसरों को मिलाकर एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी इसी सप्ताह जिले में आएगी और जांच करेगी कि सेंक्चुअरि में कहां-कहां एनएचएआई के ठेकेदारों ने नियम तोड़े हैं।
20 जनवरी की दोपहर बैराज के पास एनएचएआई का काम चल रहा था। इसी दौरान वन विभाग की टीम वहां पहुंच गई। वन अफसरों का आरोप था कि एलाइमेंट से अलग मिट्टी उठाई जा रही है और वह पेड़ भी काट दिए गए, जिसकी अनुमति नहीं दी गई थी। दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। वन विभाग ने एनएचएआई के एसडीओ और कार्यदायी संस्था के एक इंजीनियर पर केस दर्ज कर लिया। इसमें इंजीनियर को जेल भेज दिया गया। दो दिन बाद वह जमानत पर जेल से बाहर आया। घटना के कुछ घंटे बाद ही कार्यदायी संस्था का डंपर चला रहे ड्राइवर की तहरीर पर पुलिस ने वन विभाग के एसडीओ समेत पांच पर केस दर्ज कर लिया। प्रशासन ने भी इसमें कमेटी गठित की, लेकिन वन विभाग सेंक्चुअरि होने के कारण विभागीय कमेटी को ही जांच का अधिकार होने की बात कहता आ रहा था।
अब इस मामले में वन संरक्षक मुरादाबाद ने एक जांच कमेटी गठित कर दी है। इस जांच कमेटी में रामपुर और संभल के डीएफओ, बरेली के एसडीओ, और बरेली प्रवर्तन दल के रेंजर को कमेटी में शामिल किया है। यह जांच कमेटी इसी सप्ताह जांच के लिए जिले में आ सकती है। इस संबंध में पत्र जिला प्रशासन को भी भेज दिया गया है।
बिजनौर में काम शुरू होते ही शुरू हो गया था विवाद
करीब दो साल पहले बैराज के पास मेरठ-पौड़ी हाईवे पर मिट्टी डालने का काम शुरू हुआ था। इस दौरान वन विभाग ने एनएचएआई के खिलाफ एक केस दर्ज किया था। इसमें बिजनौर बैराज से कुछ दूरी पर गंगा से अवैध खनन कर सड़क पर भराव करने का आरोप था। इस मामले में प्रशासन ने भी जांच की थी और एक करोड़ का जुर्माना लगाया था। हालांकि मंडल स्तर पर अपील बताकर यह जुर्माना आज तक जमा नहीं कराया गया। उधर वन विभाग ने इसमें चार्जशीट लगा दी थी।