नूरपुर के ग्राम फीना में 150 वर्ष बाद दशहरा पर पूजन करते ग्रामीण।
- फोटो : BIJNOR
नूरपुर। करीब 150 साल पहले हुई जमीदार के पुत्र की मौत के बाद गांव फीना में ग्रामीणों ने दशहरा मनाना बंद कर दिया था। इस बार यह आन टूटी और ग्राम कल्याण समिति के सदस्यों ने ग्रामीणों से बात की और उन्हें पर्व मनाने के लिए राजीकिया। इसके बाद गांव में शस्त्र पूजन कर एवं पूजा पाठ कर त्योहार मनाया गया।
फीना जनपद के इकलौता ऐसा गांव है, जहां दशहरा का त्यौहार नहीं मनाया जाता था। ग्रामवासियों ने बताया कि करीब 150 वर्ष पूर्व गांव के जमीदार के पुत्र की दशहरे के दिन मौत हो गई थी। इसके बाद ग्रामवासियों ने विजयदशमी पर्व मनाना बंद कर दिया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही थी। दशहरे पर फीना में किसी तरह का आयोजन नहीं होता था और न ही कोई पूजा करता था।
इस वर्ष गांव की ग्राम कल्याण समिति और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पहल की और पूर्ण विधिविधान एवं हर्षोल्लास के साथ सामूहिक रूप से विजय दशमी का पर्व मनाया। इस आयोजन में हरीश कुमार चौहान, डलहौजी सिंह, समर सिंह, मनोज राजपूत, हरीश राजपूत, कमलेश चौहान, तेजेश्वरी सिंह, शशिबाला, मीना कुमारी, हीरेन्द्र कुमार, ऋषिराज सिंह एवं बबलू आदि ने प्रमुख भूमिका निभाई । ग्रामवासियों ने इस पहल का हृदय से स्वागत किया। गांव से बाहर रह रहे फीना मूल के 11 परिवारों ने भी व्यक्तिगत रूप से अपने घरों में शस्त्र पूजन कर यह पर्व मनाया। साथ ही गांव के युवकों ने रामलीला मंचन कर रावण दहन किया गया।
नूरपुर के ग्राम फीना में 150 वर्ष रावण के साथ बच्चे।- फोटो : BIJNOR