धामपुर। बरसात सिर पर है मगर अभी तक बरसाती नदियों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सकता है। बाढ़ की आशंका से निपटने के लिए कोई प्रयास न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती चली जा रही है।
बरसात के दिनों में क्षेत्र के कई गांव टापू बन जाते हैं। लोगों को आना-जाना बाधित हो जाता है। यातायात ठप हो जाते हैं। लेकिन बावजूद देश के अधिकारी क्षेत्रवासियों के शोर मचाने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। चेतावनी दी है कि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा।
गांव मोरना, तरकोला, उमरी, अलीनगर पालनी, पाडली मांडू, भटियाणा, खुशहालपुर, पुराना धामपुर, टीचर्स कॉलोनी, जीतनपुर, इंदिरा नगर कॉलोनी आदि क्षेत्र बाढ़ प्रभावित रहते हैं। इन जगहों के वासी दिनेश कुमार, महावीर सिंह, चौधरी राजेंद्र सिंह, दौलत सिंह, विजय कुमार गुप्ता, राजेंद्र शेखावत, दिनेश कुमार ने बताया कि गांगन, कडृला, इकड़ा नदी बरसात के दिनों में जमकर बर्बादी करती हैं। हजारों हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी फसलें जलमग्न होने के कारण बर्बाद हो जाती है।
धामपुर नगर क्षेत्र के बीच से गुजर रही इकड़ा नदी को पूर्व स्वरूप में लाने की मांग के बाद भी कोई प्रयास नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से बरसात के दिनों में अधिक पानी आने के कारण धामपुर नगर टापू बन जाता है। बड़ी संख्या में लोगों का भारी नुकसान होता है।
लोगों का आरोप है कि जब अधिक बारिश के कारण क्षेत्र में लोगों का आवागमन बाधित हो जाता है और सड़कों पर कई-कई फीट पानी भर जाता है। तब जिला प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि विभिन्न वाहनों के माध्यम से जलभराव से होने वाले नुकसान का आकलन करने को दौरे करते हैं। जनता को भरोसा देते हैं कि अगली बार ऐसा ना होगा। इसके पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। लेकिन जैसे ही बारिश थम जाती है, सब कुछ भूल जाते हैं। सभी लोेग पुराने ढर्रे पर जिंदगी गुजारने लगते हैं। क्षेत्र के लोगों ने जिलाधिकारी जसजीत कौर से नदियों को पूर्व स्वरूप में लाने और नदियों की जमीन को अतिक्रमण एवं अवैध कब्जों से मुक्त कराई जाने की मांग की है।
उधर तहसीलदार धनराज कुमार का कहना है कि उन्होंने संबंधित क्षेत्र के लेखपालों को निर्देशित कर दिया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से वार्ता किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। समस्या का समाधान किया जाएगा।