नगीना में किसान के खेत में खड़ी सरसों की फसल।
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बिजनौर। आम के साथ गुठलियों के भी दाम, इस कहावत को चरितार्थ कर रही है सरसों की नई प्रजाति पूसा 31, दूसरी प्रजातियों के मुकाबले इसकी पैदावार दो गुनी है साथ ही इसके सेवन से कोलस्ट्रोल भी नहीं बढ़ता है, जिससे यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सरसों की इस प्रजाति पूसा 31 का बीज किसानों को दिया गया है।
कृषि वैज्ञानिक डाक्टर केके सिंह के मुताबिक सभी लजीज खाने का स्वाद भी ले सकें और उनका कोलस्ट्रोल भी न बढ़े, इस सोच के साथ पूसा सरसों 31 तैयार किया गया है। जिले में इस प्रजाति का बीज किसानों को बोने के लिए दिया गया है। इसमें हानिकारक तत्व बहुत कम हैं। इसके अधिक प्रयोग से भी मानव स्वास्थ्य को नुकसान नहीं होगा। इसकी खेती पर जिले में निगरानी रखी जा रही है। इस साल खेतों से पैदा होने वाला बीज जिले के किसानों को बड़े पैमाने पर वितरित किया जाएगा। इस सरसों में दो तत्व इरुसिक एसिड व ग्लूकोसिनोलेट्स पाए जाते हैं। सामान्य सरसों में इरुसिक एसिड की मात्रा 40 प्रतिशत तक औरग्लूकोसिनोलेट्स की मात्रा 120 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) होती हैं। यह तत्व इतनी संख्या में कोलस्ट्रोल बढ़ाते हैं। पूसा सरसों 31 में इरुसिक एसिड की मात्रा दो प्रतिशत से भी कम है। ग्लूकोसिनोलेट्स की संख्या 30 पीपीएम है।
ज्यादा पैदावार के साथ मुनाफा
सामान्य सरसों एक बीघा में सवा क्विंटल तक निकलती है। मगर, पूसा सरसों 31 की पैदावार दो क्विंटल प्रति बीघा से भी अधिक है। यह किसानों के लिए बंपर पैदावार वाली प्रजाति है। अपने गुणों के कारण यह आम सरसों से महंगी भी बिकेगी।
संतुलित खाना लें
वरिष्ठ फिजिशियन डा. शिरिष कुमार के अनुसार कोलस्ट्रोल न बढ़ाने वाला खाना आज के समय की जरूरत है। शारीरिक श्रम न करने वालों का कोलस्ट्रोल न बढ़ाने वाला खाना लेना चाहिए।