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किसान करेंगे रोग मुक्त बासमती धान की खेती

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नगीना में कृषि विज्ञान केंद्र में खड़ी बासमती की उन्नत प्रजाति की फसल। फ़ाइल फ़ोटो। - फोटो : BIJNOR
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किसान करेंगे रोग मुक्त बासमती धान की खेती
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बिजनौर। जिले के किसान अब रोग रहित बासमती धान की खेती करेंगे। किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने रोग रहित प्रजाति तैयार की हैं। इन प्रजातियों का ट्रायल जिले में सफलतापूर्वक हो चुका है। ट्रायल में ये दोनों प्रजाति अच्छा उत्पादन दे चुकी हैं। किसानों के लिए भी यह प्रजाति कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
जिले में हर साल 50 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में धान की खेती होती है। इसमें से 30 हजार से अधिक जमीन में केवल बासमती धान की खेती की जाती है। जिले में बासमती धान की 1121 प्रजाति किसानों के बीच बहुत प्रसिद्ध थी। यह गेहूं का 42 क्विंटल प्रति हेक्टेअर तक का उत्पादन देती थी। लेकिन यह प्रजाति लगातार बीमारी का शिकार हो रही थी। इसमे बकानी रोग आने लगा था। बकानी रोग जिस पौधे में लगता है उसकी लंबाई सामान्य पौधे से ज्यादा तेजी से होती है। सामान्य भाषा में इसे जीवाणु झुलसा रोग कहते हैं। बाद में यह पौधा सूख जाता है और इससे कोई दाना नहीं मिलता है।
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कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए बिना रोग वाली धान की पूसा बासमती 1718 और पूसा बासमती 1637 प्रजाति तैयार की हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि इन प्रजातियों में कोई रोग नहीं आएगा। पूसा बासमती 1718 प्रजाति 1121 प्रजाति का और 1637 प्रजाति पूसा बासमती-9 का सुधरा हुआ रूप है। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना में लगाए गई 1718 प्रजाति ने पिछले साल 52.50 क्विंटल व पूसा बासमती 1637 प्रजाति ने 55.81 क्विंटल पैदावार दी थी। 1637 की अधिकतम पैदावार 67 क्विंटल प्रति हेक्टेअर तक है। दोनों प्रजाति जीवाणु झुलसा रोग प्रतिरोधी हैं।
विदेश जाता है जिले का धान
जिले में अफजलगढ़, नगीना आदि क्षेत्र में बासमती की बड़े पैमाने पर खेती होती है। यहां पैदा होने वाला बासमती धान देश में ही नहीं विदेशों में भी जाता है। यह खुशबूदार और लंबे दाने का होता है।
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ज्यादा होगी पैदावार
कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिक डा.केके सिंह के अनुसार जिले में धान की दो नई प्रजाति किसानों को इस बार दी जाएंगी। इनमे जीवाणु झुलसा रोग नहीं आएगा और पैदावार भी ज्यादा रहेगी।
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