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लागत बढ़ी, लेकिन नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य

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लागत बढ़ी, लेकिन नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य
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बिजनौर। प्रदेश सरकार की ओर से इस बार भी गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने से किसानों को निराशा हाथ लगी है। लगातार बढ़ रही महंगाई व किसान आंदोलन को देखते हुए गन्ने के मूल्य में कम से कम 20 रुपये तक की बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही थी। किसान भी मान बैठे थे कि सरकार दबाव में है और गन्ने के दाम बढ़ेंगे, लेकिन लगातार तीसरे साल भी किसानों मिलों में उसी दाम पर गन्ना देना होगा। जबकि रासायनिक खादों और कीटनाशक के दाम बढ़ने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार आने से पहले गन्ने की अगैती प्रजाति का दाम 315 रुपये और सामान्य प्रजाति के दाम 325 रुपये प्रति क्विंटल थे। सरकार ने 2017-18 के पेराई सत्र में गन्ने के दाम बढ़ाए थे, लेकिन इसके बाद गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए गए। गन्ने के दाम पिछले सालों की तरह 315 और 325 रुपये प्रति क्विंटल ही रखे गए हैं। जबकि इस समय कृषि कानूनों के खिलाफ करीब तीन महीने से सभी किसान संगठन आंदोलन कर रहे हैं। माना जा रहा था कि आंदोलन के दबाव में सरकार इस बार गन्ने के दाम जरूर बढ़ाएगी। किसानों को अपना गन्ना पिछले सालों के दामों पर ही बेचना होगा। जबकि पेट्रोल, डीजल, डीएपी, एनपीके के दाम चार सालों में काफी बढ़ गए हैं।
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गन्ने का भुगतान भी पूरा नहीं
चीनी मिलें अब तक पिछले सालों के दाम पर ही गन्ना भुगतान कर रही थीं। नियम के अनुसार गन्ना बेचने के 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान मिल जाना चाहिए, लेकिन किसानों को अब तक इससे आधा भुगतान ही मिला है। किसान को फसल का सही मूल्य तो क्या मिलता जो मिल रहा है वह भी समय पर नहीं मिल रहा है।
चीनी मिल गन्ना खरीद मूल्य भुगतान चीनी
धामपुर 121.15 330.81 237.58 12.24
स्योहारा 108.61 298.79 219.10 10.71
बिलाई 77.68 215.98 2.00 8.94
बहादरपुर 67.88 188.10 169.99 7.04
बरकातपुर 68.01 183.61 108.59 7.02
बुंदकी 66.95 184.04 164.93 7.02
चांदपुर 32.85 90.59 32.16 3.80
बिजनौर 21.17 59.07 2.33 2.39
नजीबाबाद 25.83 70.57 5.62 2.94
कुल 590.13 1621.60 9423.97 62.10
नोट : गन्ना खरीद लाख व चीनी लाख क्विंटल, गन्ना मूल्य व भुगतान करोड़ रुपये में है।
बसपा सरकार में गन्ना मूल्य
साल सामान्य प्रजाति अर्ली प्रजाति
2007-08 110 115
2008-09 140 145
2009-10 165 170
2010-11 205 210
2011-12 240 250
सपा सरकार में गन्ना मूल्य
2012-13 280 290
2013-14 280 290
2014-15 280 290
2015-16 280 290
2016-17 305 315
भाजपा सरकार में गन्ना मूल्य
2017-18 315 325
2018-19 315 325
2019-20 315 325
2020-21 315 325
नोट : गन्ने के दाम रुपये प्रति क्विंटल में हैं।
चार सालों में महंगाई का हाल
साल यूरिया डीएपी एनपीके डीजल पेट्रोल
2018 326.50 1076 1061 60.77 72.25
2019 226.50 1400 1375 62.30 68.91
2020 226.50 1200 1175 68.30 76.41
2021 226.50 1200 1175 74.39 83.74
नोट : 2018 में यूरिया की बोरी 50 किलो की थी। इसके बाद यह 45 किलो की कर दी गई। अप्रैल से फिर डीएपी व एनपीके के दाम बढ़ने वाले हैं।
एक बीघा गन्ने में इतनी आती है लागत
पहले जुताई 250 रुपये
पंपिंग सेट से पानी 80 रुपये
दो जुताई 500 रुपये
बीज 2000 रुपये
बोने में खर्च 500 रुपये
पंपिंग सेट से पानी 800 से एक हजार रुपये
खुदाई 700 रुपये
हल से बिधाई 500 रुपये
पत्ती छुड़वाना 400 रुपये
छिलाई व ढुलाई 1000 रुपये तक
नोट : अगर किसान ठेके पर गन्ना छिलाई कराए तो उसमें 70 क्विंटल पैदावार वाले खेत के एक से ढाई हजार रुपये मजदूरी चली जाती है। ढुलाई आदि का खर्च अलग से आता है। चार साल में महंगाई 15 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
गन्ने से बनता है इतना सामान
एक क्विंटल गन्ने से करीब 11 किलो चीनी बनती है। इसके अलावा करीब 30 किलोग्राम खोई व साढ़े चार किलोग्राम शीरा बनता है। शुगर मिलें शीरे से एथनॉल भी बनाती हैं। लेकिन शीरे के दाम पांच रुपये किलो हैं और चीनी सवा तीन रुपये प्रति किलो तक नहीं बिक रही है। चीनी मिल भी चीनी मूल्य 3400 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रही थीं, लेकिन सरकार ने चीनी के दाम भी नहीं बढ़ाए हैं।
मिलों को नुकसान : परोपकार सिंह
बिलाई चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह के अनुसार चीनी का बाजार एकदम ठप है। सरकार को चीनी के दाम बढ़ाने चाहिए थे। चीनी के दाम न बढ़ने से मिलों को भी नुकसान हो रहा है।
चीनी के दामों से ही किसानों को होगा फायदा
बरकातपुर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक विश्वासराज सिंह के अनुसार चीनी मिलों की ओर से दो साल से चीनी के दाम बढ़ाने की मांग कर रही थी। चीनी के दाम अच्छे होंगे तो किसानों को भी गन्ना मूल्य अच्छा और समय से मिलेगा।
साल चीनी गुड़
अक्तूबर 2012 2900 2280
अक्तूबर 2013 2920 2770
अक्तूबर 2014 2900 2393
अक्तूबर 2015 2610 2465
अक्तूबर 2016 3639 3210
अक्तूबर 2017 3885 4000
अक्तूबर 2018 3150 3600
अक्तूबर 2019 3250 3100
अक्तूबर 2020 3250 3500
फरवरी 2021 3150 2700
नोट : आंकड़े मिलों व कोल्हू मालिकों से लिए गए हैं।
सरकार के बुरे दिन शुरू : दिगंबर सिंह
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसानों के तो अच्छे दिन नहीं आए, लेकिन सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। लगातार तीसरे साल सरकार ने गन्ना मूल्य न बढ़ाकर खुद को किसान विरोधी साबित कर दिया है। अब किसान खुद ही सरकार को सबक सिखाएंगे।
किसान का हो रहा शोषण : वीर सिंह
भाकियू लोकशक्ति जिलाध्यक्ष वीर सिंह के अनुसार लगातार तीसरे साल गन्ना मूल्य वृद्धि न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार किसानों का केवल शोषण कर रही है। किसानों को गन्ने की खेती में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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अब किसान करेगा हिसाब : विजय सिंह
भाकियू अंबावता के जिलाध्यक्ष विजय सिंह के अनुसार सरकार को अब फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य देना चाहिए था। इस हिसाब से गन्ना मूल्य कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल बैठता। सरकार ने किसान के बारे में सोचना बंद कर दिया है तो अब किसान सरकार के बारे में सोचेगा।
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