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सड़कों पर किसानों का कब्जा, 126 जगह किया चक्का जाम

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हटौर में हल्दौर चौराहे पर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के धरने को संबोधित करते कैलाश लांबा। - फोटो : BIJNOR
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सड़कों पर किसानों का कब्जा, 126 जगह किया चक्का जाम
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केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को किसानों ने सड़कों पर कब्जा कर लिया। भाकियू, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन व आजाद किसान यूनियन के बैनर तले किसान सड़कों पर जम गए। भाकियू ने 75 जगह, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने 40 और आजाद किसान यूनियन ने जगह चक्का जाम किया। भाकियू ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की गारंटी मांगी तो राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ता ने गेहूं सड़कों पर रखकर चक्का जाम किया। कहा कि गेहूं का न्यूनतम मूल्य होने पर भी वह बाजार में उससे बहुत कम कीमत पर बिक रहा है। चक्का जाम से बड़े वाहनों के पहिये थम गए। राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि दोपहिया वाहन किसी न किसी तरह निकलते रहे। किसानों ने भी राहगीरों को ज्यादा परेशान नहीं किया।
बिजनौर। शुक्रवार को सुबह 11 बजते ही भाकियू कार्यकर्ताओं ने मंडावर रोड पर चक्कर चौराहे व राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने बैराज रोड पर कब्जा कर लिया। सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी करके किसान चक्का जाम करके बैठ गए। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ता अपने साथ बोरी में भरकर गेहूं भी लाए थे।
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भाकियू के चक्का जाम में युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से फसलों का उचित मूल्य दिलाने की कभी बात नहीं की जाती और बिजली के दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार को हर हाल में फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर उसकी खरीद की गारंटी देनी चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य के बिना किसान की फसलों का भाव व्यापारी अपनी मर्जी से तय करते हैं। अब ये चलने वाला नहीं है। इस दौरान जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, प्रदेश महासचिव रामौतार सिंह, धर्मवीर धनकड़, संदीप त्यागी, अतुल कुमार, धर्मेंद्र राठी आदि मौजूद रहे।
बैराज रोड पर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के चक्का जाम में जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि किसान को आज तक फसल का सही दाम नहीं मिला है। गेहूं का समर्थन मूल्य 1950 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन गेहूं बाजार में 1400 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है। सरकार गेहूं को कम दाम पर खरीदने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती है। कहा कि किसान देख चुके हैं कि सरकार मिल मालिकों के दबाव में न तो गन्ने का भाव बढ़ाती है और न समय से भुगतान कराती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी विलंब भुगतान पर ब्याज नहीं मिलता है। अगर सरकार चीनी मिलों के मालिकों के सामने फेल है तो बाकी पूंजीपतियों से किसानों को हक कैसे दिलाएगी। किसान अब अपनी आने वाली पीढ़ियों को पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली नहीं बनाएगा। इस दौरान राजपाल भगत, गौरव, अंकुर कुमार, दीपक चौधरी, मुकेश कुमार, राजपाल सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
ये रहीं प्रमुख मांग
- विधेयकों में संशोधन कर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की गारंटी।
- फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम मिले।
- अनुबंध खेती की व्यवस्था समाप्त हो।
- बिजली की बढ़ी दर वापस हों। एक बिजली एक बिल व्यवस्था लागू न हो।
- गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज सहित तुरंत दिलाया जाए।
- फुंके ट्रांसफार्मर 24 घंटे में बदले जाएं।
- बिजली चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली बंद हो।
वाहनों की लगी लंबी लाइन
चक्का जाम के दौरान सड़कों के दोनों ओर बड़े वाहनों की लंबी लाइन लग गई। चौपहिया वाहनों को किसानों ने नहीं जाने दिया। दोपहिया वाहन चालक किसी न किसी तरह अपने वाहन इधर उधर से निकालते रहे। किसानों ने इन राहगीरों को ज्यादा परेशान नहीं किया। हालांकि राहगीरों को चक्का जाम से थोड़ी परेशानी उठानी पड़ी। चक्का जाम के दौरान किसानों ने एंबुलेंस और अंतिम यात्रा वाहनों को नहीं रोका। उन्हें जाने दिया। ऐसे वाहनों को निकालने के लिए किसानों ने एक अलग टीम लगा रखी थी। यह टीम एंबुलेंस को दूर से देखते ही सक्रिय हो जाती थी। किसानों ने चक्का जाम में सोशल डिस्टेंसिंग का ज्यादा पालन नहीं किया।
पुलिसकर्मियों ने आराम से की ड्यूटी
चक्का जाम के दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। पुलिसकर्मियों ने चक्का जाम के पास आने वाले वाहन चालकों को रोका और दूसरे रास्तों से भेजा। हालांकि इस दौरान पुलिसकर्मी आराम से किसानों से बात करते दिखे। उन्हें किसानों की ओर से कोई अव्यवस्था न फैलाए जाने पर भरोसा था। चक्का जाम के दौरान रोडवेज बसों के लिए रूट डायवर्ट किया गया। मंडावर की ओर से जाने वाले वाहन नजीबाबाद रोड से निकले। बैराज की ओर जाने वाली बसों को बाईपास मार्ग आवास विकास से निकाला गया।
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जाम लगाकर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
नूरपुर/अफजलगढ़/चंदक/मंडावर/नगीना/स्योहारा/चांदपुर। नूरपुर में भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मीकांत शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान झंडा चौक पहुंचे। सड़क पर अवरोधक लगाकर चांदपुर और अमरोहा मार्ग बंद कर दिया। थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा गया। अफजलगढ़ में किसानों ने मिल गेट पर अपनी विभिन्न मांगो को लेकर चक्का जाम कर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सीओ सुनीता दहिया को ज्ञापन सौंपा। मंडावर में भाकियू के मंडल महासचिव राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में मंडावर-बिजनौर रोड पर प्रीतम सिंह के नेतृत्व में जाम लगाया गया। चंदक में आकियू व किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर गांव तिमरपुर व दौलतपुर चौराहे पर चक्का जाम लगाया। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने दौलतपुर चौराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। नगीना में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने चौधरी वीर सिंह डबास व डॉक्टर धर्मवीर सिंह के नेतृत्व में नगीना-नजीबाबाद रोड स्थित बूंदकी तिराहे पर जाम लगाया। स्योहारा में ब्लाक अध्यक्ष गजेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने तीन जगह चक्का जाम किया। कांग्रेस पार्टी ने भी जाम का समर्थन किया। चांदपुर में बिजनौर-बदायूं और चांदपुर-गजरौला मार्ग पर गांव बागड़पुर में रोड जाम लगाया गया। अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह क्रांति दिवस को किसान मुक्ति दिवस के रूप में मनाया। चांदपुर-नहटौर मार्ग पर मोहल्ला संतनगर में रोड पर कृषि विधेयक का पुतला फूंका। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन कार्यकर्ताओं ने चौधरी चरण सिंह चौक पर जाम लगाया।

कोतवाली देहात में ज्ञापन सौंपते भाकियू भानू के कार्यकर्ता।- फोटो : BIJNOR

चांदपुर में चौधरी चरण सिंह चौक पर जाम लगाते राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन कार्यकर्ता।- फोटो : BIJNOR

चांदपुर के गांव बागड़पुर में प्रदर्शन कर जाम लगाते भाकियू कार्यकर्ता।- फोटो : BIJNOR

चंदक में दौलतपुर चौराहे पर चक्का जाम करके धरने को संबोधति करते राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के का?- फोटो : BIJNOR

अफजलगढ़ में भाकियू के चक्का जाम के दौरान परेशान यात्री।- फोटो : BIJNOR

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