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किसान मांग रहे 450 रुपये गन्ना मूल्य

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किसान मांग रहे 450 रुपये गन्ना मूल्य
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बिजनौर। केंद्र सरकार ने गन्ने की एफआरपी में पांच रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करके दाम 290 रुपये प्रति क्विंटल कर दिए हैं। पंजाब में गन्ने के दाम 310 रुपये से बढ़ाकर 360 रुपये प्रति क्विंटल किए हैं। जिले के किसानों को भी इस बार गन्ने के दामों में अच्छा खासा इजाफा होने की उम्मीद है। किसान चार साल से एक ही दाम पर गन्ना बेच रहे हैं। यहां के किसान गन्ने का दाम साढ़े चार सौ रुपये करने की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार के अनुसार स्वामीनाथन आयोग ने गन्ने की लागत 300 रुपये प्रति क्विंटल बताई है। इसके हिसाब से गन्ने का दाम कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। इससे कम दाम किसानों को मंजूर नहीं है। साथ ही किसानों को विलंब भुगतान पर ब्याज भी मिलना चाहिए। जो भाजपा नेता एफआरपी बढ़ाने पर खुश हैं उन्हें प्रदेश सरकार से भाव बढ़वाने चाहिए।
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भाकियू लोकशक्ति जिलाध्यक्ष वीर सिंह के अनुसार पांच सालों में खाद, बीज, तेल के दाम और मजदूरी बहुत बढ़ गई है। किसान किसी तरह खेती करके घर चला रहे हैं। गन्ना वेस्ट यूपी के किसानों की प्रमुख फसल है और प्रदेश सरकार ने चार साल पहले गन्ने के दाम में केवल दस रुपये बढ़ाए थे। किसानों को गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए। केंद्र के एफआरपी का प्रदेश में कोई महत्व नहीं है।
भाकियू प्रवक्ता संदीप त्यागी के अनुसार भाजपा ने चुनाव से पहले फसल लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने की बात कही थी। सरकार ने चार साल से अपना वादा पूरा नहीं किया है। अब सरकार को गन्ने का दाम कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए। कहा कि वेस्ट यूपी के गन्ने का सही दाम देकर ही किसानों का भला किया जा सकता है।
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भाकियू अंबावता जिलाध्यक्ष शिव कुमार के अनुसार किसानों को गन्ना दाम कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए। सरकार अब गन्ने से इथनॉल बनाने की बात कर रही है जिससे मिलों को फायदा होगा। चीनी मिल अब भी फायदे में ही चल रही हैं। पांच साल की महंगाई और किसानों के खर्च को ध्यान में रखकर सरकार को फैसला लेना चाहिए।
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