बिजनौर में जोधूवाला रोड पर पटाखा फैक्टरी में आग लगने से जला सामान।
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बिजनौर। नौआबाद-जोधूवाला रोड पर पटाखा फैक्टरी में आग लगने के बाद एक के बाद एक कई धमाके हुए। इन धमाकों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा। मकान से उठी आग की लपटें और धुएं का गुब्बार उठता देख आसपास बन रहे मकानों में काम कर रहे लोग सहम गए। लोगों ने घटनास्थल की ओर दौड़ लगा दी। फैक्टरी के गेट पर ताला लगाया गया था, ताकि अंदर क्या हो रहा है किसी को पता न चले।
गांव फतेहपुर नौआबाद बिजनौर से सटा है। चक्कर रोड से कटकर एक रास्ता गांव जोधूवाला को जा रहा है। इस रास्ते पर सड़क किनारे नई कॉलोनी काटी जा रही हैं। कॉलोनी में कुछ मकान बन गए हैं। कुछ मकान बनाने की तैयारी हैं। बृहस्पतिवार को कई मजूदर व मिस्त्री मकान बनाने में लगे थे। कॉलोनी मे रहने वाले बाकी लोग अपने कामकाज में लगे थे। दोपहर करीब पौन बजे एक मकान से अचानक आग की लपटें उठने लगी और एक के बाद एक कई धमाके हुए। धमकों की आवाज इतनी तीव्र थी कि पूरा इलाका दहल उठा। देखते ही देखते मकान से ऊंची-ऊंची आग की लपटें और धुएं का गुब्बार उठने लगा। लोगों ने आग बुझाने को कंट्रोल रूम को सूचना दी और कुछ ही समय में अग्निशमन के साथ अधिकारियों की टीम दौड़कर मौके पर पहुंच गई। जैसे-तैसे आग पर काबू पाया गया। हालांकि इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी प्रशासनिक अधिकारी जांच का हवाला देते हुए इन सवालों से बचते नजर आए।
बाहर ताला, अंदर आतिशबाजी
आसपास के लोगों का कहना है कि उन्हें मालूम ही नहीं था कि मकान में क्या हो रहा है। आग लगने के बाद उन्हें पता चला कि यहां आतिशबाजी की अवैध फैक्टरी चल रही थी। यह भी बताया कि मुख्य गेट पर ताला लगा था, इस कारण किसी के अंदर होने का किसी को अंदाजा तक नहीं था। हालांकि घटना के कुछ समय तक कोई कुछ बताने को तैयार ही नहीं था। यह फैक्टरी कब से चल रही थी, इस बारे में भी कोई कुछ नहीं बता पाया। लोगों का कहना था कि जिस मकान में आग लगी है, वह दो साल पहले ही बना था।
यूसुफ ने किराए पर लिया था मकान
जिस मकान में आतिशबाजी की अवैध फैक्टरी चल रही थी, वह नहटौर के मोहल्ला तीरगारान निवासी आबिद का है। आबिद ने ये मकान बनाया था। आबिद से यूसुफ ने मकान किराए पर ले रखा है। मकान से 100 गज की दूरी पर बने दो-तीन मकानों के पास यूसुफ की आतिशबाजी की फैक्टरी है। पर मकान किराए पर लेकर वह यहां आतिशबाजी बनवा रहा था। पिछले डेढ़ साल से ये आतिशबाजी बन रही थी। गुपचुप तरीके से आतिशबाजी बनाने का ये खेल चल रहा था। किसी को भी आतिशबाजी बनाने की कानों कान खबर नहीं थी। बताया जा रहा है कि सारा खेल यूसुफ के कहने पर चल रहा था।