प्रशासनिक अधिकारी इसकी रूप रेखा बनाने में जुट चुके हैं। खासबात यह है कि यहां अधिकांश कार्य जनसहयोग से ही कराए जाएंगे। इसके लिए आस्थावान लोगों को इस मुहिम से जोड़कर कार्य कराए जाएंगे। आयुर्वेद के लिए जहां प्राइवेट कॉलेजों से यहां मदद ली जाएगी, वहीं सरकारी आयुर्वेदिक विभाग में से कुछ चिकित्सकों की यहां तैनाती हो सकती है। माना जा रहा है कि जल्द ही यह योजना कागजों से निकलकर धरातल पर दिखनी शुरू हो जाएगी।
बथुए का साग और अर्जुन की छाल की चाय भी मिलेगी
विदुरकुटी पर आने का लोगों के पास अभी केवल पौराणिक कारण ही है। प्रशासन की योजना सफल रही तो लोग जहां महात्मा विदुर की भूमि के दर्शन कर पाएंगे। वहीं बथुए के साग का स्वाद और अर्जुन की छाल की चाय भी पी सकेंगे। इसके अलावा असाध्य बीमारियों का आयुर्वेदिक, पंचकर्मा के माध्यम से उपचार भी करा सकेंगे।
कण्व ऋषि की भूमि पर उगेगी विदुरभूमि के लिए औषधि
विदुरकुटी पर बनने वाले आयुर्वेदिक संस्थान या अस्पताल के लिए आयुर्वेदिक औषधि की व्यवस्था पर भी योजना बननी शुरू हो गई है। कण्व ऋषि आश्रम की भूमि पर जो पौधरोपण होना है, उसमें मेडिशनल प्लांट भी लगाए जाएंगे। यहां उगाई औषधि से विदुरभूमि पर जाने वाले मरीजों का उपचार किया जाएगा। इस पर भी योजना तैयार की जा रही है।
विदुरकुटी पर कार्य कराने की योजना तैयार की जा रही है। आयुर्वेदिक अस्पताल शुरू करने पर योजना बन रही है। अभी यह कागजों में है, सबकुछ ठीक रहा तो शीघ्र ही इसे शुरू कराया जाएगा।-
उमेश मिश्रा, डीएम, बिजनौर