चांदपुर देवी मंदिर पर नवरात्रि महोत्सव पर आयोजित रासलीला में नरसी चित्रण मंचन में चल रहे संवाद
चांदपुर। देवी मंदिर में आयोजित नवरात्र महोत्सव के अंतर्गत चल रही महारासलीला के छठे दिन ‘नरसी चरित्र’ का अत्यंत भावपूर्ण मंचन किया गया।
मंचन में दिखाया कि नरसी सदैव श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी भक्ति की परीक्षा उस समय हुई जब उनकी बेटी के ससुराल पक्ष की ओर से नातिन के विवाह के लिए भात में अत्यंत कम समय में सोना, चांदी, आभूषण, वस्त्र, मेवा, बर्तन, अन्य सामग्री लाने के साथ आने का निमंत्रण आया। जब निमंत्रण पत्र लेकर पंडित नरसी के घर पहुंचे, तो नरसी यह सुनकर आश्चर्यचकित रह गए कि उनकी नातिन विवाह योग्य हो गई है। उन्होंने पंडित को आदरपूर्वक बैठाया, लेकिन घर में खाने की कोई व्यवस्था न होने के कारण वे स्वयं व्यवस्था करने निकल पड़े। इसी बीच भगवान कृष्ण ने लीला रचते हुए नौकर का रूप धारण किया और पंडित को भोजन कराते हुए कहा कि यह भोजन नरसी ने भेजा है। जब नरसी खाली हाथ लौटे तो वे चिंता में पड़ गए कि पंडित को क्या खिलाएंगे, लेकिन पंडित ने बताया कि उनका नौकर पहले ही स्वादिष्ट भोजन करा गया है। यह सुनकर नरसी भाव-विभोर हो गए और बोले कि वह उनका नौकर नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के स्वामी हैं और हम सभी उनके सेवक हैं।
भात प्रसंग के मंचन में दिखाया गया कि जब नरसी के पास देने के लिए कुछ भी नहीं था, तब उन्होंने पूर्ण विश्वास के साथ अपनी सारी चिंताएं भगवान कृष्ण को सौंप दीं। भक्त की लाज रखने के लिए भगवान कृष्ण द्वारिकाधीश के रूप में ‘सांवल शाह’ नामक धनी सेठ बनकर प्रकट हुए और अपार धन-संपत्ति के साथ भात भरकर नरसी का मान-सम्मान बढ़ाया। इस लीला में शहरवासियों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। भात भरने के लोगों ने अपने-अपने घरों से सामान लाकर सहयोग किया।