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कोरोना को मात देने में जी जान से जुटे वाहन चालक

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कोरोना को मात देने में जी जान से जुटे वाहन चालक
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बिजनौर। कोरोना को मात देने में चिकित्सकों से लेकर वाहन चालक तक कोरोना को मात देने में लगे हैं। इस महामारी से पार पाने के लिए ये वाहन चालक पूरी निष्ठा के साथ रोजाना लिए जाने वाले सैंपल जांच के लिए लखनऊ लेकर जा रहे हैं। अन्य योद्धाओं के साथ साथ वाहन चालक भी हमारे कोरोना वॉरियर्स हैं। हम सभी को इनका सहयोग करना चाहिए।
इस वैश्विक महामारी में एक ओर जहां हर कोई घरों में रहकर लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर वाहन चालक चिकित्सकों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में सभी लोग अपने घरों में कैद हैं, लेकिन वाहन चालक अपनी ड्यूटी निभाने में पीछे नहीं हट रहे हैं।
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आम जनमानस का सहयोग जरूरी
वाहन चालक मीनू कुमार ने बताया कि इस मुश्किल घड़ी में सहयोग करना सभी की जिम्मेदारी है। जब तक आम जनमानस इसमें सहयोग नहीं करेगा तो तब तक कोरोना को नहीं हराया जा सकता।
आवश्यकता पड़ने पर जाते हैं लखनऊ
वाहन चालक मानवीर सिंह ने बताया कि वर्तमान में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी एस.के निगम के सारथी हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे सैंपल लेकर लखनऊ जाते हैं। हर दिन अलग अलग वाहन चालक सैंपल लेकर लखनऊ जाता है।
सैंपल को सुरक्षित लैब तक पहुंचाना अहम कार्य
चालक फ्रैंक आस्कीन ने बताया कि यदि प्रयोगशाला तक सैंपल जांच के लिए पहुंच जाता है, तो समझो आधे से अधिक कार्य पूर्ण हो गया। यह कार्य सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी पर मरीज का आगामी भविष्य तय होता है।
मुश्किल भरे सफर से भी नहीं करते गुरेज
वाहन चालक अनुज कुमार यादव का कहना है कि हमारा काम उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन करना है। वैसे भी अब तक देश पर आई आपदा से पार पाने के लिए सभी का परस्पर एक-दूसरे के साथ सहयोग करना बेहद ही जरूरी है।
सतर्कता से पूरा करते हैं सफर
वाहन चालक जबर सिंह के अनुसार वे जांच कराने के लिए कई बार सैंपल लेकर लखनऊ जा चुके हैं। हर बार पूरी सतर्कता के साथ वे सफर पूरा करते हैं। हालांकि लॉकडाउन के कारण इस दौरान रोड पर वाहनों की आवाजाही न के बराबर रहती है, लेकिन फिर भी बिजनौर से लखनऊ की दूरी अधिक होने के कारण सफर करना बड़ा ही मुश्किल होता है।
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तीन दिन तक नहीं पहुंच पाते घर
वाहन चालक मधुसूदन वर्मा बताते हैं कि सैंपल लेकर लखनऊ जाने और वहां से आने में तीन दिन का समय लगता है। केवल लखनऊ तक जाना ही नहीं पड़ता। वहां पर पहुंचने के बाद अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

वाहन चालक जबर सिंह।- फोटो : BIJNOR

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