नींदडू। शुक्रवार रात मस्जिद पीर फतेह अलीशाह के मैदान में इस्लाही जलसे का आयोजन हुआ। इसमें तकरीर करते हुए मुफ्ती सदाकत हुसैन ने बताया कि इस्लाम से पहले अरबों में शराब पीने का बड़ा रिवाज था, जिस व्यक्ति के पास जितनी पुरानी शराब होती थी, उसे उतना ही सभ्य माना जाता था। इस्लाम आने के बाद जब कुरआन मुकद्दस में शराब पीने को हराम करार दिया गया, तब सहाबा कराम ने न सिर्फ शराब काे पीना छोड़ दिया, अपितु शराब के तमाम जखीरे नालियों में बहा दिए।
मुफ्ती मोहम्मद कासिम ने समाज में मौजूद बुराइयों पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने सामूहिक दुआ कराई। जलसे की सदारत मुफ्ती मोहम्मद हंजला और निजामत कारी मुबीन राही ने की। तिलावत कारी इमरान और नात मुबीन कुरैशी ने की। इस अवसर पर बड़ी तादाद में उलमा एवं श्रोता मौजूद रहे।