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हिंदी गद्य विधा को बढ़ा रहे डॉ. पंकज भारद्वाज

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पंकज भारद्वाज। - फोटो : BIJNOR
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हिंदी गद्य विधा को बढ़ा रहे डॉ. पंकज भारद्वाज
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बिजनौर। डॉ. पंकज भारद्वाज हिंदी साहित्य में निरंतर अपना योगदान दे रहे हैं। वह अपने प्रखर वक्तव्य से हिंदी का प्रसार कर रहे हैं। हिंदी पर बोलने के लिए देशभर के कई हिस्सों से निमंत्रण आते हैं। वह पत्रकारिता से जुड़े हैं। वहीं, कहानी पर पत्रकारिता का प्रभाव विषय पर पीएचडी भी कर चुके हैं। उनकी आधा दर्जन से ज्यादा किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।
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धामपुर में जन्मे डॉ. पंकज भारद्वाज ने हिंदी साहित्य से स्नातकोत्तर करने के बाद हिंदी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। वह गत 25 वर्षों से लेखन कार्य कर रहे हैं। उनकी अब तक आधा दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें धामदेव की नगरी धामपुर, मां तेरे चरणों में, पंकज की कहानियां, भारत की कवयित्रियां तथा प्रखर पुरुष प्रमुख हैं। डॉ. पंकज भारद्वाज ने देश के कई प्रमुख शहरों में रहकर साहित्य लेखन तथा पत्रकारिता की है। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं तथा अनेकों संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है।
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