साहित्य जगत का कारवां हैं डॉ. महावीर अधिकारी
बिजनौर। अपने प्रख्यात निबंधों, कथाओं, रचनाओं व पत्रकारिता से आजादी की अलख लगाने वाले डॉ. महावीर अधिकारी साहित्य जगत में जिले की ओर से एक बड़े स्तंभ के रूप में स्थापित हुए। साहित्य के दम पर दर्जन भर देशों की यात्राएं कर चुके डॉ. अधिकारी साहित्य जगत में विभिन्न रूपों में स्थापित सशक्त हस्ताक्षर हैं। अपना पूरा जीवन उन्होंने हिंदी साहित्य की सेवा में लगा दिया।
डॉ. महावीर अधिकारी का जन्म जिले के गांव पैगंबरपुर में एक जनवरी 1918 को हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की। हाईस्कूल नगीना से किया। बीए पंजाब विश्वविद्यालय से किया। वे अंग्रेजी शासनकाल में सेना में लेफ्टिनेंट पद पर भी रहे, लेकिन अपने पिता चौधरी भगवंत सिंह व परिचित वैद्य वासुदेव त्यागी के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित होकर फौज की नौकरी छोड़ घर आ गए। दिल्ली से जनसंपर्क व स्थानीय बोलियों के भाषात्मक भिन्नता के अध्ययन के लिए 17 मार्च 1941 में कलकत्ता तक पैदल यात्रा की। कलकत्ता में सात अगस्त को गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। वहीं से उन्हें रचनाकार की गरिमा की अनुभूति हुई। कलकत्ता में प्रसिद्ध उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा के संपर्क में आकर समाचार पत्र विचार में काम करना शुरू किया। जागृति, विशाल भारत और विश्वामित्र समाचार पत्रों में सहयोग किया। धीरे धीरे दैनिक हिंदुस्तान और नवभारत टाइम्स के मुंबई संस्करणों के संपादक पद तक पहुंचे। दिल्ली में 1943 में नवयुग के कार्यकारी संपादक नियुक्त हुए।
आजादी के आंदोलन से जुडे़ रहने के साथ ही ज्ञानोदय, समाज के संपादक रहे। 1978 से 1983 तक करंट का संपादन किया और कलम कमाल नाम से स्तंभ लिखते रहे। राजनीतिज्ञों, सफेदपोशों पर कठोर व्यंग किए। देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे पंडित लालबहादुर शास्त्री की जीवनी लिखी। नरम गरम जैसे व्यंग संग्रह उन्होंने ही हिंदी साहित्य को अर्पित किए। डॉ. अधिकारी को 1976 में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
निबंध, उपन्यास और कविताएं लिखीं
डॉ. महावीर अधिकारी का दूसरा रूप निबंधकार का रहा। उन्होंने आदमी का गणित, रामदुर्ग निबंध लिखे। उनकी लिखी कहानियां कोशी, जीवन के मोड़ कहानी संग्रहों में हैं। मंजिल से आगे, तलाश, मानस मोती जैसे यथार्थवादी उपन्यास भी लिखे। मानस मोती पर आपको महाराष्ट्र हिंदी अकादमी की ओर से प्रियदर्शनी अवार्ड मिला।
अच्छी नहीं थी परिवार की आर्थिक स्थिति
डॉ. महावीर अधिकारी का पैंगंबरपुर में घर अब भी है। इनके बेटे दिल्ली में सरकारी सेवा में हैं। वे यदा- कदा गांव आते रहते हैं। घर की देखरेख के लिए गांव में एक व्यक्ति को छोड़ा हुआ है। गांव के लोग महावीर अधिकारी के बारें में कुछ नहीं बता पाते। गांव के ही लखनऊ में रह रहे समाजसेवी हरीशचंद्र कश्यप बताते हैं कि महावीर अधिकारी के पिताजी भगवंत सिंह त्यागी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ताजपुर रियासत के त्यागी लोगों ने उनको मदद कर दसवीं पास कराईं।
डा.महावीर अधिकारी(फाइल फोटो)- फोटो : BIJNOR
बिजनौर के गांव पैगंबरपुर में डा.महावीर अधिकारी आवास।- फोटो : BIJNOR