नगीना के सिद्धपीठ मां काली मंदिर पर उमडे़ श्रद्धालु
नगीना। प्राचीन सिद्धपीठ मां काली और मां दुर्गा का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में जो भी व्यक्ति मन्नत मांगता है, माता रानी उसे अवश्य पूरा करती हैं। इसलिए इस प्राचीन सिद्धपीठ पर दोनों नवरात्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। लोग मां के दरबार में हाजिरी लगाकर नारियल, चुनरी आदि चढ़ाकर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रों के दिनों में नवविवाहित दंपती माता से सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं।
करीब 400 साल पुराने मंदिर में मां काली की प्रतिमाओं में विशेष तेज देखा जा सकता है। प्राचीन काल से यह सिद्धपीठ मां काली के मंदिर के नाम से प्रख्यात रही है। मंदिर की प्रबंधन समिति ने धीरे-धीरे इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। नवरात्र के दिनों में श्रद्धालु सुबह पांच बजे से ही पूजा अर्चना करने के लिए तथा शाम को आरती में हिस्सा लेने के लिए यहां आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पहले यहां घना जंगल होता था। तब यहां रामलीला बाग में हरिद्वार से आए साधुओं ने मां दुर्गा एवं काली की मूर्तियों की स्थापना की थी। तभी से यहां श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना की जा रही है। कहा जाता है कि बहुत से लोग मनोकामना पूरी होने पर यहां नवरात्र में मन्नत स्वरूप नंदी भी छोड़ते हैं। मंदिर कमेटी के पदाधिकारी बताते हैं कि मां काली, मां दुर्गा के मंदिर की बहुत मान्यता है।