-वन विभाग संदिग्ध मछुआरों के नाम भी अपनी डायरी में किए दर्ज, होगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर (बिजनौर)। राष्ट्रीय पक्षियों की मौत गुत्थी सुलझ नहीं रही है। फिलहाल वन विभाग भी किसी निष्कर्म पर पहुंचने में नाकाम हैं। हालांकि वन विभाग की टीम ने गांव भिक्कावाला के जंगल में पेट्रोलिंग की। कई संदिग्ध लोगों के नामों को नोट किया है। बताया गया कि ये लोग घटनास्थल के आसपास नदी में मछली पकड़ते हैं। इन लोगों से मोरों की मौत के मामले में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
रेंजर गोविंद राम गंगवार ने बताया कि शेरकोट क्षेत्र के भिक्कावाला के जंगल में पिछले एक सप्ताह के भीतर आठ राष्ट्रीय पक्षी मोरों की मौत हो चुकी है। इनमें दो मादा मोर शामिल है। अधिकारियों का प्रथम दृष्टया मानना है कि कहीं इन मोरों को जहर देकर मरने वाला गिरोह तो सक्रिय नहीं हो गया है। इस परिप्रेक्ष्य में रविवार को वन विभाग के रेंजर गोविंद राम गंगवार ने डिप्टी रेंजर हरदेव सिंह, दरोगा लक्ष्मी चंद, क्षेत्रपाल सिंह के साथ शनिवार को घटनास्थल के आसपास जंगलों में पेट्रोलिंग की।
निरीक्षण किया कि जंगल में किसी प्रकार का जहरीला दाना या अन्य पदार्थ तो नहीं पड़ा। रेंजर का कहना है कि उन्हें इस प्रकार का कोई सबूत नहीं मिला। कुछ लोगों से जानकारी मिली कि जिस जगह मोरों के शव मिले हैं, वहां नदी में अक्सर हरेवली और आसपास के कई गांवों के लोग मछलियां पकड़ते हैं। लोगों ने मछुआरों के नाम भी वन विभाग के अधिकारियों को नोट करवाए।
रेंजर का कहना है कि वन विभाग की ओर से संबंधित लोगों से इस संबंध में पूछताछ की जाएगी। संदिग्धता सिद्ध होने पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इन लोगों के नाम पुलिस को भी ट्रेस कर दिए गए हैं।
एक मोर के गले में फंसा मिला कंदूरी फल
शनिवार को शेरकोट थाना क्षेत्र के गांव भिकका वाला के जंगल में सात मृत मोरों की शव बरामद हुए थे। वन विभाग के अधिकारियों ने सभी मृत मोरों का पोस्टमार्टम करने के बाद राजकीय सम्मान के साथ तिरंगे में लपेटकर दफन कर दिया था। रेंजर गोविंद राम गंगवार ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान एक मोर के गले में कंदूरी फल फंसा मिला था। घटनास्थल पर भी कंदूरी फल लगे हुए हैं। आशंका जताई कि कंदूरी फल के गले में फंस जाने के कारण मोरों की मौत हुई हो।