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42 दिन में ही हो गए एनएच-119 में गहरे गड्ढे

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42 दिन में ही हो गए एनएच-119 में गहरे गड्ढे
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बिजनौर। पिछले महीने ही एनएच-119 (मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे) को गड्ढामुक्त किया गया था, लेकिन यह मरम्मत 42 दिन भी नहीं टिक सकी। अब हाईवे में फिर से गहरे गड्ढे बन गए हैं। जिससे ट्रैफिक की रफ्तार कम हो रही है। वहीं, हादसों का खतरा हर वक्त बना रहता है।
सितंबर महीने के पहले सप्ताह में एनएचएआई ने बैराज रोड के गड्ढों को भर दिया। मरम्मत किए हुए ज्यादा वक्त भी नहीं हुआ था कि हाईवे में फिर से गड्ढे बन गए हैं। बिजनौर बैराज से एक किलोमीटर पहले हाईवे पूरी तरह से दरक चुका है। आठ जगह ऐसी हैं जहां एक-एक फीट गहरे और तीन-तीन मीटर चौड़े गड्ढे बने हुए हैं। तीन स्थानों पर ब्रेक लगाकर वाहन बेहद धीमी गति से निकालने पड़ते हैं। बता दें कि हाईवे को फोरलेन में भी तब्दील किया जा रहा है। जब से फोरलेन की कवायद शुरू हुई है, तब से बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य नहीं हो सका है। गड्ढे बनते हैं तो उन्हें भर दिया जाता है, फिर उसी गड्ढे के पास दूसरा बन जाता है। बिजनौर बैराज के बीच मध्य गंगा नहर का पुल बना हुआ है। इस पुल पर भी गड्ढे हैं। पुल का स्लैब टूटने लगा है, जिसकी सरिया साफ दिखाई दे रही है। ऐसे में पुल के स्लैब को भी खतरा बना हुआ है।
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ओवरलोड वाहनों से दरक रही सड़क
एनएचएआई के अफसरों का दावा है कि हाईवे पर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। मानकों के अनुसार एक एक्सल पर दस टन वजन उपयुक्त होता है। यानि अगर किसी ट्रक में तीन एक्सल हैं तो तीस टन वजन ओवरलोड नहीं कहलाएगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो सड़कों पर क्षमता से कई गुणा ज्यादा लोड वाले वाहन दौड़ रहे हैं। ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए एनएचएआई जिला प्रशासन को पत्र भी लिख चुका है।
सड़क में नए स्थानों पर दो दिन की बारिश की वजह से गड्ढे बन गए हैं। गड्ढों की जगह चिह्नित कर ली गई है। जल्द ही गड्ढे भर दिए जाएंगे। ओवरलोड वाहनों की वजह से मियाद पूरी होने से पहले ही हाईवे दरक रहा है। इसके लिए कई बार पत्र भी लिखें जा चुके हैं - दिनेश कुमार चतुर्वेदी।
ओवर लोड वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलता रहा है। हर महीने 150 से 200 वाहनों को पकड़कर चालान किए जाते हैं - शिव शंकर सिंह, एआरटीओ।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग -
एक से लेकर दो-दो फीट गहरे गड्ढे बिजनौर-मेरठ वाली सड़क पर बने हुए हैं। इनकी वजह से जाम की स्थिति बनी रहती है। वाहनों के टायर फट रहे हैं और अन्य टूट-फूट होने का खतरा बना रहता है - अरविंद पाल सिंह।
बैराज तक दस किलोमीटर का सफर करने में ही आधा घंटे का वक्त गड्ढों की वजह से लग जाता है। पहले यह दूरी 10 से पंद्रह मिनट में ही पूरी कर ली जाती थी। सड़क टूटने के कारण हादसों का खतरा रहता है - नाहर सिंह।
बिजनौर-बैराज रोड सिर्फ नाम का ही हाईवे रह गई है। मालूम ही नहीं पड़ता कब गड्ढा आ जाए। गड्ढों से धीमी स्पीड में निकलते वक्त पीछे से तेज रफ्तार वाहन टक्कर न मार दे, यह डर बना रहता है - नरदेव सिंह।
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सड़क खराब होने की वजह से मेरठ तक जाने में ही ढाई घंटा लगता है। पहले पौने दो घंटे में सफर पूरा हो जाता था। अब गड्ढों के कारण यात्रा का समय बढ़ गया है। हाईवे पर वाहन माइलेज भी ठीक नहीं दे रहे हैं - नन्हें सिंह।
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