आवाज आई, हेलो अवधेश मैं तुम्हारी बुआ का दामाद बोल रहा हूं। मैं सड़क दुर्घटना में घायल हो गया हूं। मुझे अपना इलाज कराना है, मेरे नंबर पर कुछ पैसे भेज दो। घबराहट वाली आवाज सुनते ही अवधेश ने आनन फानन में पूछा कि जीजा जी कितने पैसे भेजने हैं। उधर से आवाज आई, अस्पताल में तीस हजार रुपये जमा करने हैं।
मानवता दिखाते हुए अवधेश ने अपने एक साथी से उस नंबर पर तीस हजार रुपये डलवा दिए। अवधेश फिर से अपने काम में व्यस्त हो गया। घर पहुंचकर अवधेश ने ने सारी बात अपने घर बताई तो घरवालों ने उस रिश्तेदारी में खबर लेने को फोन किया।
पूछने पर मामला कुछ और ही निकला। तब उस परिवार को समझ आया कि हमारे साथ ठगी हो चुकी है। इसके बाद घटना की तहरीर पुलिस को दे दी। इस संबंध मे शहर कोतवाल राजीव कुमार ने बताया की तहरीर आई है, मामले की जांच की जा रही है। सभी लोगों को ऐसे ठगों से सतर्क रहना चाहिए।
आसानी से न करें विश्वास, पहले पड़ताल कर लें: एएसपी सिटी
एएसपी सिटी डॉ. प्रवीण रंजन सिंह कहते हैं कि इस तहर की ठगी करने वाले अपराधी ट्रूकाॅलर एप के माध्यम से आपका नाम पता कर लेते हैं। फिर नए नंबर पर फोन मिलाते हैं। सामने वाले का नाम संबोधित करके बात करके खुद को उसका रिश्तेदार बताते हैं। रिश्ता दूर का बताते हैं, ताकि आसानी से पहचान न पाए। ऐसे में हमें हड़बड़ी न करके पहले इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए। इस तरह रुपये मांगने वाले लोग फर्जी और ठग हो सकते हैं।