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बाढ़ में डूबी फसल, अब सता रहा कर्ज का डर

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रेहड़। पहले बारिश और बाढ़ किसानों के लिए मुसीबत बन गई, अब फसलों के नुकसान से कर्ज का डर किसानों को परेशान कर रहा है। किसान जहां लागत भी न लौटने की आशंका से परेशान है, वहीं दूसरी ओर पानी में भीगने से धान के काला पड़ने से नुकसान का दर्द और बढ़ गया। कर्ज लेकर फसल उगाने वाले किसानों को अभी से ही कर्जदारों के तकादे का डर सताने लगा है।
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फसल बेचकर चुकाना था कर्ज : नसीम अहमद
हाईवे पर धान सूखा रहे नसीम अहमद ने बताया कि उसने तीन एकड़ धान लगाया था। जो तेज हवा व वर्षा से बिछ गया है, धान पानी में भीगने से बर्बाद हो गया। उसे अपनी फसल बेचकर कर्ज चुकाने था उल्टे वह और कर्जदार हो गया है, उसे धान की फसल से करीब एक लाख का नुकसान हुआ है।
आठ बीघा धान पानी में भीगकर खराब : जगपाल
जगपाल निवासी केहरीपुर का कहना है कि उसने केहरीपुर में तीन एकड़ में धान की फसल लगाई थी, जिसमें से आठ बीघा धान पानी में भीगकर खराब हो चुका है, जिसे वो सुखाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि उनका बहुत सा धान पानी में डूबा पड़ा है, उन्हें इस बार बेटी की शादी करनी थी, जिसकी उम्मीद भी तेज पानी में बह गई है।
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कटी फसल भीगने से हुई खराब : सौराज सिंह
सौराज सिंह निवासी कासमपुरगढ़ी ने बताया कि वह दो एकड़ धान लगाया था, जो कुछ कट गया था, कुछ खेत में खड़ा था, जो पूरी तरह पानी में भीगने से बर्बाद हो गया है। अभी भी खेत में पानी भरा है। उसे कम से कम 80 हजार से अधिक का नुकसान हुआ है। बारिश ने किसानों की कमर के साथ उनकी उम्मीद भी तोड़ दी है।
सात एकड़ धान हो गया बर्बाद : वसीम
वसीम निवासी रेहड़ ने बताया की मौजा दहलावाला में उनकी खेती की जमीन है, जिसमें 15 एकड़ में धान लगाया था। जिसमें 7 एकड़ पूरी तरह पानी में भीगने से बर्बाद हो गया हैै। उसे बहन की शादी करनी थी। फसल भीग जाने से उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है।

रेहड़ के जगपाल सिंह।- फोटो : BIJNOR

रेहड़ के सौराज सिंह।- फोटो : BIJNOR

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