बिजनौर। जच्चा बच्चा सुरक्षित हो। इस उद्देश्य से सरकार ने गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सेवा शुरू की थी। लेकिन अब ई-रूपी वाउचर से निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा ठप हो गई है। तीन महीने से गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जिम्मेदारों से पूछा तो उन्होंने बताया कि पोर्टल में बदलाव होने से बजट जारी नहीं हो रहा है।
सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भावस्था में निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराने की सुविधा दो साल पहले शुरू की थी। जिले में चिन्हित 22 अल्ट्रासाउंड केंद्र पीपीपी मोड पर योजना से जुड़े हुए हैं। जिन पर वाउचर के जरिए गर्भवती महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड होता है।
मगर, 25 अगस्त से यह सुविधा नहीं दी जा रही है। इसका कारण विभागीय पोर्टल से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए ई-रूपी वाउचर जारी नहीं होना है। ऐसे में गर्भवतियां खुद के खर्च पर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हैं।
n ऐसे वाउचर से होता है निशुल्क अल्ट्रासाउंड : लाभार्थी को पहले नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर नाम व फोन नंबर बताना पड़ता है। वहां सीएचसी पर ई-वाउचर जेनरेट होता है। इस वाउचर को जब लाभार्थी नजदीकी निजी अस्पताल में जांच कराने पर उसके फोन पर ओटीपी आता है। लाभार्थी के ओटीपी बताने पर ही अल्ट्रासाउंड संचालक अल्ट्रासाउंड करता है।
n अभी शुरू नहीं हो सका एसएनए स्पर्श पोर्टल : एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि अभी तीन माह पहले तक गर्भवतियों को फेम्स पोर्टल के माध्यम से ई-रूपी वाउचर जारी हो रहा था। इससे ही उनका निशुल्क अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था। लेकिन इस पोर्टल को बंद कर दिया गया है। इसकी जगह भारत सरकार एसएनए स्पर्श पोर्टल शुरू कर रही है। स्पर्श पोर्टल शुरू नहीं होने से यह समस्या हो रही है।
n जिले में पंजीकृत हैं 65 हजार गर्भवती महिलाएं : स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 65 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। इनमें से स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाली महिलाओं की जांच कर दवाई दी जाती है। वहीं, हर महीने की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को जांच कर निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए वाउचर जारी किया जाता था।