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गैंग ने देहरादून के प्रॉपर्टी डीलर की ले रखी थी सुपारी

Thu, 20 Aug 2015 11:41 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर। एसटीएफ उत्तराखंड और नजीबाबाद पुलिस ने बद्री पेपर मिल के गार्ड से मारपीट करके बंदूक , मोबाइल और नगदी लूटने वाले गैंग को दबोचा है। गैंग यूपी और उत्तराखंड राज्य में सक्रिय था।
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गैंग ने हरिद्वार जेल में बंद शातिर बदमाश जितेंद्र रावत उर्फ जित्ती से देहरादून के प्रॉपर्टी डीलर पंकज यादव को ठिकाने लगाने की पांच लाख की सुपारी ले रखी थी।

एसपी सिटी कल्पना सक्सेना के मुताबिक 13 अगस्त की रात में बदमाशों ने नजीबाबाद क्षेत्र में बद्री पेपर मिल के गार्ड कुंवरपाल सिंह से मारपीट कर दोनाली बंदूक, कारतूस और मोबाइल लूट लिए थे।
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एसटीएफ उत्तराखंड और नजीबाबाद पुलिस ने बिजनौर जिले के मंडावर थाना क्षेत्र के गांव खूड़ाहेड़ी निवासी अनिल कुमार, बढ़ापुर थाने के गांव भगवानपुर निवासी राकेश और इसी गांव के कोमल को दबोचकर लूटी बंदूक, कारतूसों की बेल्ट और 12 हजार रुपये बरामद किए थे। गैंग का सरगना अनिल है। जहां वारदात करनी होती है, वहां की गैंग पहले रैकी करता है।

गैंग ने 31 जुलाई को कोतवाल ीदेहात के गांव मुस्सेपुर में भी दो घरों में लूट की थी। इस वारदात के दो मोबाइल और पांच हजार रुपये भी पुलिस ने बरामद किए हैं। 18 जुलाई को मंडावली थाना क्षेत्र के क्रेशर में, छह अगस्त को नगीना देहात के गांव खुशहालपुर में हुई लूट की घटनाओं में भी गैंग ने हाथ होना कबूला।


पकड़े गैंग ने पुलिस को बताया देहरादून के नत्थनपुर निवासी प्रॉपर्टी डीलर पंकज यादव की हत्या के लिए हरिद्वार जेल में बंद बदमाश जितेंद्र रावत उर्फ जित्ती ने जेल में बंद दो बदमाशों के माध्यम से गैंग को पांच लाख की सुपारी दी थी। पंकज रावत की हत्या करने के लिए गैंग दो बार देहरादून गया था, सफल नहीं हुआ। गैंग कई बार जेल जा चुका है।  गैंग के सदस्य राकेश और कोमल बढ़ापुर के हिस्ट्रीशीटर अपराधी हैं। एसपी ने गैंग को पकड़ने वाली टीम को पांच हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

मोबाइल तक नहीं रखता गैंग
गैंग इतना शातिर है कि यह गैंग अपने पास मोबाइल भी नहीं रखता था। गैंग को डर रहता है सर्विलांस के जरिये कहीं वे पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ जाएं। गैंग वारदात करने किसी वाहन से नहीं जाता था। जहां वारदात करनी होती थी, गैंग के सदस्य ट्रेन और बस से वहां पहुंचते थे। घटना को अंजाम देने के बाद वापस अपने ठिकानों पर आ जाते थे। गैंग का एक सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गया और उसने ही सारे राज उगल दिए।

गैंग में दस सदस्य
पकड़े गैंग में दस सदस्य हैं। अभी सात पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े हैं। गैंग का सेंटर बढ़ापुर क्षेत्र रहता था। बढ़ापुर पुलिस को गैंग के सदस्यों पर शक न हो, गैंग के सदस्य पुलिस के इर्द गिर्द ही ज्यादा रहते थे। ताकि पुलिस को ये लगे कि ये कहीं नहीं जाते। थाने में भी ये अपनी आमद लगाते रहते थे।
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