बिजंनौर। किरतपुर इलाके के ढाकी हुसैनपुर गांव में इस्लामिक विजन स्कूल में जाकिर नाईक को नायक बताकर पढ़ाई जा रही किताब के मामले में बीएसए ने स्कूल के संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि विवादित किताब नियम विरुद्ध क्यों पढ़ाई जा रही थी। नोटिस मिलने से स्कूल के संचालक व स्टाफ में खलबली मची हुई है।
नर्सरी से कक्षा आठ तक संचालित इस्लामिक विजन स्कूल में कक्षा दो के बच्चों को इल्म उन नाफेे नाम की विवादित किताब खुलेआम पढ़ाई जा रही थी। इस किताब के 22 वे अध्याय में देश से फरार जाकिर नाईक को इस्लामिक जगत की अन्य हस्तियों के साथ नायक बताकर पढ़ाया जा रहा था। यह किताब नियम विरुद्ध पढ़ाई जा रही थी। अमर उजाला नेे 30 जनवरी के अखबार में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। स्कूल से रातों रात किताब को गायब कर दिया गया।
31 जनवरी को किताब के मामले में जांच करने गई बेसिक शिक्षा विभाग की टीम को किताब के बारे में स्कूल से कोई जानकारी नहीं मिली। दो फरवरी को टीम फिर से स्कूल में जांच करने गई तो टीम को किताब पढ़ाने के सबूत मिल गए। स्कूल के संचालक ने खुद कबूल लिया कि किताब स्कूल में पढ़ाई जा रही थी। दिसंबर में किताब को स्कूल में पढ़ाना बंद कर दिया है। स्कूल के बच्चे भी किताब के बारे में बताते हुए हिचकिचाते रहे। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट बीएसए महेश चंद को दे दी। बीएसए ने स्कूल के संचालक को नोटिस दिया है। नोटिस में कहा गया है कि विवादित किताब नियम विरुद्ध स्कूल में क्यों पढ़ाई जा रही थी। नोटिस में किताब के मामले में स्कूल संचालक से जवाब मांगा गया है। नोटिस मिलने के बाद से स्कूल के स्टाफ व संचालक में खलबली मची हुई है। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने स्कूल को नोटिस भेजने की पुष्टि की है।