फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस ने नाबालिग के खिलाफ की शांतिभंग की कार्रवाई

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
बरसठी। बहन के साथ छेड़खानी की शिकायत करने थाने पहुंचे किशोर को ही पुलिस ने शांति भंग का आरोपी बना दिया। उसे कुछ देर तक थाने में बैठाने के बाद छोड़ तो दिया लेकिन उस पर कार्रवाई कर दी। एसडीएम कोर्ट से नोटिस पहुंचने पर परिवार के लोगों को इसकी जानकारी हुई। आरोपी किशोर गुरुवार को अपने अधिवक्ता और ग्राम प्रधान के साथ एसडीएम कोर्ट पहुंचा। वहां अधिवक्ताओं ने पुलिस की करतूत पर खूब हो-हल्ला मचाया। एसडीएम के मौजूद न रहने के कारण सुनवाई के लिए नौ फरवरी की तिथि नियत की गई है।
विज्ञापन

बरसठी थाने मलाई गांव निवासी किशोर का पिता रोजी रोटी के सिलसिले में मुंबई रहते हैं। छह माह पूर्व मनबढ़ों ने उनके घर पर हमला बोलकर मारपीट की और उसकी बहन से छेड़खानी की। ग्राम प्रधान के साथ थाने पहुंचे किशोर ने पुलिस को तहरीर दी थी कि पुलिस ने तहरीर लेकर रख लिया और पीड़ित को घर भेज दिया। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई अलबत्ता पीड़ित किशोर और मुंबई में रह रहे उसके पिता के खिलाफ शांति भंग के आरोप में कार्रवाई कर पुलिस ने चालान भेज दिया था। लंबे समय तक कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर एसडीएम कोर्ट ने नोटिस भेजकर आरोपियों को तामील कराने का पुलिस को आदेश दिया। नोटिस तामील के लिए पहुंचे पुलिसकर्मी जब आरोपी को नाबालिग देखा तो चुपचाप वहां से चले जाना ही उचित समझा। उसने नोटिस पर लिखा कि परिवार के सभी सदस्य मुंबई रहते हैं, लिखकर कोर्ट को भेज दिया। हफ्ते भर पूर्व कोर्ट ने जमानती नोटिस भेजकर आरोपियों को तलब किया। नोटिस लेकर पुलिस आरोपियों के घर पहुंची। किशोर को जमानत कराने के लिए धमकाने लगी। पुलिस की डर से नाबालिग गांव के प्रधान व बीडीसी के साथ गुरुवार को तहसील मुख्यालय पहुंचा। अधिवक्ता अभयराज सिंह ने किशोर के उम्र प्रमाणपत्र 13 साल देख कर हो हल्ला करना शुरू कर दिया। इस संबंध में सीओ रामभवन यादव ने कहा कि पुलिस ने ऐसा किया तो यह गलत है। सभी थानेदारों को निर्देश है कि नाबालिग को बिना पर्याप्त कारण शांतिभंग में चालान नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें