बंधुआ मजदूर बनाए गए असम के परिवार को मुक्त कराया
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। गांव झंडापुर के पास बंधुआ मजदूर बनाकर रखे गए असम के परिवार को जिला प्रशासन ने छुड़ा लिया। परिवार से कूड़ा बीनने का काम कराया जा रहा था। परिवार के सभी सात सदस्य मेरठ चले गए हैं। इस मामले में बिजनौर के एक व्यक्ति और असम के एक ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
असम के जिला बोगोई के रहने वाले आइनल हक ने डीएम कार्यालय में दिए पत्र में आरोप लगाया था कि असम के रहने वाले शहादत अली और बिजनौर के मोहल्ला चाहशीरी के रहने वाले रईस अहमद ने उसके परिवार को गांव झंडापुर के पास बंधक बना रखा है। डीएम अटल कुमार राय के आदेश पर एसडीएम बृजेश सिंह, सीओ सिटी महेश कुमार, श्रम विभाग के निरीक्षक पीएन बिजल्वाण ने इस मामले की जांच की तो आरोप सही पाया। रईस अहमद आईनल हक की पत्नी और बच्चों से कूड़ा बीनवाता था। टीम ने आईनल हक की पत्नी सनियारा तथा छह बच्चों मोमना, सनीदुलान, बॉबीदुल, रोहुल आमीन, आईमोना व पप्पू को आजाद कराया। परिवार ने बताया कि वे जिले में करीब ढाई महीने से रह रहे हैं। उन्हें एक महीने से बंधक बनाकर रखा गया था। आईनल हक कुछ समय से उनके साथ नहीं रह रहा था। कूड़े से पॉलिथीन आदि बीनकर जो पैसा एकत्र करते थे वह रईस अहमद ले लेता था। सभी परिजन मेरठ में अपने एक रिश्तेदार के यहां चले गए हैं। निरीक्षक पीएन बिजल्वाण ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।